नई द‍िल्‍ली: वित्त वर्ष 2021-22 का बजट 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का तीसरा बजट होगा। इस बजट से हर किसी को काफी उम्मीदें हैं। इसी कड़ी में देश में खिलौनों के सेक्टर को भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से काफी उम्मीदें हैं।

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खिलौना क्षेत्र के लिए नीति की घोषणा कर सकती है सरकार
इस बजट सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देने के लिए खिलौना क्षेत्र के लिए एक प्रतिबद्ध नीति की घोषणा कर सकती है। म‍िली जानकारी के मुताबिक इस नीति से देश में उद्योग के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने और स्टार्टअप को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय पहले ही खिलौनों की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देने के लिए कदम उठा रहा है। मंत्रालय ने क्षेत्र के लिए गुणवत्ता नियंत्रक आदेश जारी किया है, साथ ही पिछले साल खिलौनों पर आयात शुल्क बढ़ाया है। वहीं गुणवत्ता नियंत्रण आदेश से घरेलू बाजार में सस्ते कम गुणवत्ता वाले खिलौनों के प्रवाह को रोका जा सकेगा।

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खिलौना निर्यात करीब 10 करोड़ डॉलर पर सीमित
इस बात की भी खबर मिली है कि अंतरराष्ट्रीय खिलौना उद्योग में भारत की हिस्सेदारी काफी कम है। वहीं वैश्विक मांग में भारत के निर्यात का हिस्सा 0.5 फीसदी से भी कम है। ऐसे में इस क्षेत्र में काफी अवसर हैं। खिलौना क्षेत्र के लिए शोध एवं विकास और डिजाइन केंद्रों को भी प्रोत्साहन दिया जा सकता है। मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन से देश से खिलौना निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस क्षेत्र में अभी चीन और वियतनाम जैसे देशों का दबदबा है। भारत का खिलौना निर्यात करीब 10 करोड़ डॉलर पर सीमित है।

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चीन से होता है खिलौनों का लगभग आयात
भारत में खिलौना उद्योग मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र है। इसमें लगभग 4000 छोटे व मंझोले उद्योग हैं। देश में खिलौनों का लगभग 85 फीसदी आयात होता है। इसमें से अधिकतर आयात चीन से होता है। इसके बाद श्रीलंका, मलेशिया, जर्मनी, हॉन्ग कॉन्ग और अमेरिका से आ​यात होता है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत में पूरी दुनिया के लिए एक खिलौना हब बनने की प्रतिभा और क्षमता है और "स्थानीय खिलौनों के बारे में मुखर" होने के दौरान स्टार्टअप को इस क्षमता को साकार करने के लिए काम करने का आह्वान किया।

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