नई द‍िल्‍ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी शन‍िवार को वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश किया। बजट में इनकम टैक्स स्लैब से लेकर बैंक​ डिपॉजिट इंश्योरेंस को बढ़ाने के साथ ही कई बड़े ऐलान किए है। इसके साथ ही बता दें कि नए कर प्रस्ताव से निर्यातकों और एमएसएमई को नुकसान हो सकता है। इस साल कर कानूनों में बदलाव व्यवसायों, विशेष रूप से निर्यातकों, को नुकसान कर सकता है। वित्तीय घाटा के लक्ष्य को प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण : मूडीज ये भी पढ़ें

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बजट 2020 का प्रस्ताव है कि एक विक्रेता को एक वर्ष में 50 लाख रुपये से अधिक के सामानों की बिक्री पर एक खरीदार से स्रोत (TCS) के रूप में एकत्र किए गए कर को इकट्ठा करना चाहिए, यदि विक्रेताओं की बिक्री वर्ष के दौरान 10 करोड़ रुपये से अधिक है। अगर खरीदार के पास पैन या आधार नहीं है, तो टीसीएस की दर 1 फीसदी होगी। कर विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक अत्यंत कठोर और प्रतिगामी प्रावधान है जिसे बहुत अधिक सोच के बिना पेश किया गया है। यह कई एमएसएमई को प्रभावित करेगा, लेकिन निर्यातकों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा क्योंकि उनके ज्यादातर विक्रेता भारत के निवासी नहीं हैं और इसलिए उनके पास पैन या आधार नहीं है।

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इसका मतलब यह है कि निर्यातकों को अपनी जेब से 1 प्रतिशत TCS का भुगतान करना होगा या उन्हें कम प्रतिस्पर्धी बनाकर अधिक मार्जिन पर सामान बेचना होगा। इस कदम से अनुपालन बोझ के साथ-साथ कई व्यवसायों की कार्यशील पूंजी में भी वृद्धि होगी। सेरिल अमरचंद मंगलदास के प्रमुख, अंतर्राष्ट्रीय कराधान, दक्षा बक्सी का कहना है कि इस प्रावधान का परिचय सरकार के कर रिसाव को रोकने और संग्रह में सुधार करने के उत्साह के माध्यम से नहीं सोचा गया है।

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