नयी दिल्ली। अपनी फाइनेंशियल स्थिति को सुधारने के लिए सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल अपनी कुछ चुनिंदा प्रॉपर्टी बेचने जा रही है। बीएसएनएल ने निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग या डीआईपीएएम को 14 संपत्तियों की डिटेल्स दी है, जिनकी कुल वैल्यू करीब 20,160 करोड़ रुपये है। संपत्तियों की बिक्री के जरिये पैसे जुटाना बीएसएनएल की काफी महत्त्वाकांक्षी योजना है। इस बीच क सरकारी सूत्र के मुताबिक कौशल विकास मंत्रालय जमीन खोज रहा है और दूरसंचार विभाग ने मंत्रालय को बीएसएनएल की गाजियाबाद में मौजूद जमीन की पेशकेश की है, जिसका मूल्य 2000 रुपये है। बीएसएनएल संपत्ति बेच कर 20000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने के लिए काफी प्रयास कर रही है। जिन संपत्तियों की बीएसएनएल करेगी वे मुंबई, तिरुवनंतपुरम, चेन्नई, गाजियाबाद और अन्य स्थानों पर हैं। बता दें कि बीएसएनएल और एमटीएनएल की वित्तीय हालत बेहद खराब है, जिसे सुधारने के लिए सरकार ने अक्टूबर में 69,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया था।
कमजोर फाइनेंशियल हालत को देखते हुए सरकार ने बीएसएनएल और एमटीएनएल के विलय का ऐलान किया था। एमटीएनएल का विलय बीएसएनएल में हो जायेगा। दोनों कंपनियों ने विलय से पहले अपने ऊपर वेतन बिल का दबाव कम करने के लिए कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना यानी वीआरएस भी दी थी। दोनों कंपनियों के करीब 92,700 कर्मचारियों ने वीआरएस के लिए आवेदन भी किया। दरअसल इस योजना का मकसद घाटे और कर्ज में चल रही दोनों सरकारी कंपनियों के वार्षिक वेतन बिल में 8800 करोड़ रुपये की बचत करना है। अगले तीन सालों में इन दोनों की कुछ संपत्तियों को बेच कर करीब 37,500 करोड़ रुपये जुटाये जाने की उम्मीद है। 14 संपत्तियों की बिक्री का प्रस्ताव बीएसएनएल की इसी योजना का हिस्सा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एमटीएलएन ने पिछले 10 में से 9 सालों में घाटे की जानकारी दी है। वहीं बीएसएनएल 2010 से ही घाटे में है। जहां तक जमीन बिक्री का सवाल है तो बीएसएनएल ने विशिष्ट भूमि पार्सल की बिक्री के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के साथ चर्चा शुरू कर दी है है। इसके अलावा दूरसंचार विभाग ने बीएसएनएल की सोवरेन गारंटी बॉन्ड जारी करने की योजना के बारे में वित्त मंत्रालय को भी बताया है। एक बार मंजूरी मिलने के बाद इन्हें फरवरी की शुरुआत में जारी किया जा सकता है।
सरकार की योजना दोनों कंपनियों को जल्द ही 4जी स्पेक्ट्रम देने की है। इन दोनों कंपनियों के रिवाइवल यानी हालत सुधारने के लिए सरकार ने 69,000 करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान के बाद अब इसे जल्दी से लागू और निगरानी करने के लिए सात सदस्यीय मंत्री समूह का गठन किया है। इस समिति में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, संचार, सूचना प्रौद्योगिकी तथा कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य व उद्योग तथा रेल मंत्री पीयूष गोयल तथा तेल, प्राकृतिक गैस तथा इस्पात मंत्री धर्मेद्र प्रधान शामिल हैं। ये उच्च-स्तरीय समूह बीएसएनएल और एमटीएनएल के लिए फैसलों को लागू करने में तेजी लाएगा, जिसमें 4जी स्पेक्ट्रम दिया जाना और संपत्ति की बिकवाली के जरिये पूँजी जुटाना शामिल है।
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