X Suspended in These Countries News: चीन, उत्तर कोरिया, ईरान, म्यांमार, पाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान में 'X' को पहले ही बंद कर दिया गया था। अब हाल में ही ब्राजील मे X की मोबाइल और वेब दोनों वर्जन को सस्पेंड कर दिया गया है। यहां की सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक्स प्लेटफॉर्म की सर्विसेस को बंद किया गया है। आइए आपको बताते हैं कि ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट और X के मालिक एलन मस्क के बीच में लंबे समय से विवाद किस बात पर चल रहा है और अन्य देशों में इसे क्यों सस्पेंड कर दिया गया है।
जानिए क्या है ब्राजील और X का पूरा मामला?
ब्राज़ील के सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एलेक्जेंडर डी मोरेस और मस्क के बीच कई महीनों से विवाद चल रहा है। साल 2024 की शुरुआत में ही मोरेस ने X को कुछ एक्स के अकाउंट्स को बंद करने का आदेश दिया था क्योंकि ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, इन अकाउंट्स पर फेक न्यूज और नफरत फैलाने का आरोप था, लेकिन X ने जज के इस आदेश का पालन नहीं किया। एलन मस्क ने बताया कि जज उनके ऐप पर 'सेंसरशिप' लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
X ने कुछ समय बाद ही ब्राजील में अपने सारे ऑफिस बंद कर दिए। हालांकि, प्लेटफ़ॉर्म की सर्विस देश में यूजर्स के लिए उपलब्ध रही और X ने तब दावा किया कि जस्टिस मोरेस ने कंपनी के ब्राज़ील में कानूनी प्रतिनिधियों में से एक को गिरफ्तार करने की धमकी दी थी, अगर उसने कहना नहीं माना। मस्क ने तब जज के फैसले का विरोध करते हुए उन्हें अत्याचारी और तानाशाह भी कहा और कुछ सस्पेंड किए गए अकाउंट को फिर से एक्टिव करने के लिए कहां थी। एलन मस्क ने मोरेस को 'नकली जज' भी कहा। ब्राजील के कानूनों के अनुसार, इंटरनेट की कंपनियों को सभी कानूनों का पालन करना जरूरी है।
ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट में X मामले पर हुई थी सुनवाई
ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट में X मामले पर 30 अगस्त को सुनवाई हुई थी और जस्टिस मोरेस ने एलन मस्क को आदेश दिया कि वो 24 घंटे के अंदर ब्राजील में X के लिए एक कानूनी प्रतिनिधि नियुक्त करें वरना उनकी सोशल मीडिया साइट को देश में सस्पेंड कर दिया जाएगा। लेकिन एलन मस्क ने इस बात पर कोई एक्शन नहीं लिया। इस पर 31 अगस्त को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने X को 'तत्काल और पूर्ण रूप से निलंबित' करने का आदेश दिया।
चीन, रूस, उत्तर कोरिया और इन देशों में इस कारण से एक्स की सर्विसेस को बंद किया गया
चीन के बीजिंग ने जून 2009 में ट्विटर पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस समय चीन Tiananmen Massacre की 20वीं वर्षगांठ थी और सरकार को डर था इस समय कुछ लोग भड़काऊ जानकारी फैला सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन में ट्विटर को बैन किए जाने के बाद भी यहां लगभग 10 लाख यूजर्स VPN के जरिए इसका इस्तेमाल करते हैं।
इसके अलावा ईरान ने साल 2009 में भी ट्विटर पर रोक लगा दी थी, जब जून में हुए राष्ट्रपति चुनाव के बाद प्रदर्शनों की लहर चल पड़ी थी। तुर्कमेनिस्तान ने 2010 के प्रारंभ में कई अन्य विदेशी ऑनलाइन सेवाओं और वेबसाइटों के साथ ट्विटर को भी ब्लॉक कर दिया था।
अश्गाबात में अधिकारी नागरिकों द्वारा इंटरनेट के उपयोग पर कड़ी निगरानी रखते हैं, जो राज्य द्वारा संचालित एकाधिकार ऑपरेटर तुर्कमेन टेलीकॉम के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है।
वहीं, उत्तर कोरिया में प्योंगयांग ने देश में रुचि रखने वाले विदेशियों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए 2010 में अपना ट्विटर अकाउंट खोला था, लेकिन अप्रैल 2016 से फेसबुक, यूट्यूब और पोर्नोग्राफी वेबसाइटों के साथ इस एप्लीकेशन को भी ब्लॉक कर दिया गया है। रूस में मॉस्को द्वारा साल 2021 से ट्विटर तक पहुंच को रोक दिया गया था, जिसमें शिकायत की गई थी कि ये सोशल मीडिया प्लेटफार्म यूजर्स को गलत जानकारी फैलाने की अनुमति दे रही थी।
रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के ठीक बाद मार्च 2022 में औपचारिक प्रतिबंध लगाया गया। इसके अलावा पकिस्तान में भी एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) को बैन कर दिया गया था।
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