बीआईटीएस पिलानी हैदराबाद कैंपस के कुछ होनहार छात्रों द्वारा शुरू किया गया रक्षा तकनीक स्टार्टअप अपोलियन डायनेमिक्स (Apolion Dynamics) इन दिनों सुर्खियों में है। इस स्टार्टअप ने भारतीय सेना को जम्मू, चंडीमंदिर, पानागढ़ और अरुणाचल प्रदेश जैसे अहम इलाकों में यूएवी (Unmanned Aerial Vehicles) यानी मानव रहित हवाई वाहन सप्लाई किए हैं।

Advertisement

सिर्फ दो महीने में मिली बड़ी सफलता

जयंत खत्री और सौर्य चौधरी के नेतृत्व में इस स्टार्टअप ने लॉन्च के महज दो महीने के अंदर ही सेना को ड्रोन की पहली खेप सौंप दी। इतनी जल्दी किसी डिफेंस स्टार्टअप का भारतीय सेना के साथ काम करना बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

Advertisement

बिड़ला के सामने हुआ तकनीक का प्रदर्शन

अपोलियन डायनेमिक्स की तकनीक को हाल ही में बीआईटीएस पिलानी हैदराबाद कैंपस में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कुमार मंगलम बिड़ला (आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन) की उपस्थिति में प्रस्तुत किया गया। इस प्रदर्शन ने दिखाया कि कैसे युवा इनोवेटर्स राष्ट्रीय सुरक्षा में बड़ा योगदान दे सकते हैं।

भारत में बनी पूरी तरह स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलॉजी

अपोलियन डायनेमिक्स के बनाए ड्रोन पूरी तरह से देश में डिजाइन और विकसित किए गए हैं। इन ड्रोन को खासतौर पर भारत के अलग-अलग इलाकों और मुश्किल मिशनों के लिए तैयार किया गया है। इनमें लॉन्ग रेंज सर्विलांस, पेलोड डिलीवरी और सटीक हमला (कामिकेज़) क्षमताएं शामिल हैं।

Advertisement

कामिकेज़ ड्रोन की खास बात यह है कि यह 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है और 1 किलो तक का विस्फोटक पेलोड लक्ष्य पर छोड़ सकता है।

जवानों को मिल रहा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग

स्टार्टअप न केवल ड्रोन बनाता है बल्कि सेना के जवानों को ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग भी देता है। खास बात यह है कि ये ट्रेनिंग इतनी आसान है कि बिना किसी पहले के अनुभव वाला व्यक्ति भी कुछ ही दिनों में कुशल ड्रोन ऑपरेटर बन सकता है।

Advertisement

नई पीढ़ी के ड्रोन पर काम जारी

फिलहाल खत्री और चौधरी की टीम अगली पीढ़ी के VTOL (Vertical Take-Off and Landing) और फिक्स्ड विंग सिस्टम्स पर काम कर रही है। इससे उनके ड्रोन की क्षमता और अधिक बढ़ेगी और ये अगली पीढ़ी के मल्टी रोल UAVs के रूप में काम कर पाएंगे।

शिक्षा से इनोवेशन की ओर

अपोलियन डायनेमिक्स की सफलता इस बात का उदाहरण है कि भारत के शिक्षण संस्थान जैसे बीआईटीएस पिलानी अब केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं। वे अब इनोवेशन, रक्षा, टेक्नोलॉजी और देश की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

Advertisement

अपोलियन डायनेमिक्स जैसे युवा स्टार्टअप यह साबित कर रहे हैं कि भारत के पास न केवल टैलेंट है, बल्कि अब वह विश्व स्तरीय रक्षा टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है।