Bitcoin News Today: जैसे ही अमेरिकी चुनाव के नतीजे सामने आने लगे, बिटकॉइन ने अपने पिछले रिकॉर्ड्स को तोड़ते हुए नए शिखर की ओर बढ़ रहा. कॉइन मेट्रिक्स डेटा के मुताबिक डिजिटल करेंसी 75,000 डॉलर के नए शिखर पर पहुंच गई, जोकि अंत में 7% की बढ़त के साथ 74,392 डॉलर पर बंद हुई. इस बढ़त के साथ बिटकॉइन ने 14 मार्च को बनाए 73,797.68 डॉलर के अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. इसके बाद से बिटकॉइन साल के ज्यादातक समय 70,000 डॉलर के निशान से नीचे रहने के बाद बना था. क्रिप्टोकरेंसी पर अमेरिका में हो रहे चुनाव का असर दिखा रहा, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प शुरुआती इलेक्टोरल कॉलेज की गिनती में आगे नजर आ रहे.
अमेरिकी चुनाव पर निवेशकों की नजर
निवेशक बिटकॉइन पर चुनाव के प्रभाव पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं, जब तक कि कोई निर्णायक परिणाम सामने नहीं आता, तब तक उतार-चढ़ाव की आशंका है. उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस की संभावित जीत बिटकॉइन के लिए गिरावट का ट्रेंड की टेंशन बढ़ा सकती है, जबकि डोनाल्ड ट्रम्प की जीत से क्रिप्टोकरेंसी के नए शिखर पर पहुँचने की उम्मीद है. सीएनबीसी डॉट कॉम से बातचीत में बिटवाइज़ एसेट मैनेजमेंट के रिसर्च हेड रयान रासमुसेन ने कहा कि चुनाव का क्रिप्टो पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि इलेक्शन रिजल्ट की परवाह किए बिना, बिटकॉइन की वैल्यू बढ़ने की संभावना है.
बाजार का रिएक्शन और इनवेस्टर सेंटीमेंट
चुनाव को लेकर जो आशंकाएं हैं, उनका असर न केवल बिटकॉइन पर पड़ा है, बल्कि इससे जुड़े बाजारों पर भी इसका असर पड़ा है. उदाहरण के लिए, एक्सचेंज ऑपरेटर कॉइनबेस ने आफ्टर-ऑवर्स ट्रेडिंग में 3% की बढ़त देखी, जबकि एक अन्य महत्वपूर्ण प्लेयर माइक्रोस्ट्रेटजी ने 4% की उछाल देखी. ये उतार-चढ़ाव चुनाव के नतीजों के प्रति ब्रॉडर मार्केट की संवेदनशीलता और क्रिप्टोकरेंसी सेक्टर पर इसके संभावित प्रभाव को दर्शाते हैं.
आगे किन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर?
मार्केट एनलिस्ट बिटकॉइन के लिए चुनाव के परिणामों पर अटकलें लगा रहे हैं, संभावित रुझानों का पूर्वानुमान लगाने के लिए ऐतिहासिक डेटा का उपयोग कर रहे हैं. रासमुसेन के मुताबिक बिटकॉइन ने ऐतिहासिक रूप से अमेरिकी चुनावों के बाद महत्वपूर्ण लाभ देखा है, जिसमें 2012, 2016 और 2020 के चुनावों के बाद 90 दिनों के भीतर लगभग 87%, 44% और 145% का रिटर्न मिला है. इन ट्रेंड्स को आंशिक रूप से बिटकॉइन हाफिंग घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है, जो चुनाव के वर्षों के साथ मेल खाते हैं. इसकी वजह से क्रिप्टोकरेंसी की सप्लाई कम हो जाती है. इसके अलावा फेडरल रिजर्व की पॉलिसी खासकर ब्याज दरों पर फैसले का असर भी भी बिटकॉइन के चुनाव के बाद के प्रदर्शन पर असर डाल सकती हैं.
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