नई दिल्ली, सितंबर 07। सोने के आयात में हो रही बढ़ोत्तरी और इसकी कीमतों में आ रही ऊछाल को देखते हुए निजी भागीदारी के साथ देश में सोने के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही एक विस्तृत रोडमैप तैयार करेगी।

Advertisement

निजी निवेश को बढ़ावा

इकोनॉमिक टाइम्स के खबर के मुताबिक इस योजना के तहत सरकार 2030 तक देश भर में विकसित किए जाने वाले संभावित सोने वाले क्षेत्रों की पहचान करेगी और सोने के खनन में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए आवश्यक नीति बनायेगी। नीति आयोग ने देश में संभावित सोने की खानों की पहचान करने के लिए एक व्यापक अध्ययन किया है और अगले 10 वर्षों के लिए एक अखिल भारतीय अन्वेषण कार्यक्रम प्रस्तावित किया है।

Advertisement
सोने के खदानों की पहचान करेगी सरकार

नीति आयोग ने देश में संभावित सोने की खानों की पहचान करने के लिए एक व्यापक अध्ययन किया है और अगले 10 वर्षों के लिए एक अखिल भारतीय अन्वेषण कार्यक्रम प्रस्तावित किया है। इकोनॉमिक टाइम के खबर के मुताबिक अध्ययन करने के बाद जो प्रमुख सिफारिशे पेश की गई हैं। उनमें, भारत में सोने के खनन के लिए छोटे खोजकर्ताओं को प्रोत्साहन प्रदान करना शामिल है।' इसके अलावा, सोने के खनन को लागत-प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कुछ नीतिगत बदलाव करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है

2021-22 के दौरान भारत का सोने का आयात 33.41 प्रतिशत बढ़कर 46.16 बिलियन डॉलर हो गया। सोने का आयात पिछले वर्ष में 34.6 बिलियन डॉलर का था। पिछले वर्ष सोने के आयात में कमी वित्त वर्ष में व्यापार घाटे को 192.41 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर वित्त वर्ष 21 में 102.62 बिलियन डॉलर करने का एक प्रमुख कारण था। विभाग ने जिन 102 प्राथमिकता वाली वस्तुओं की पहचान की है। इनका आयात भारत में बड़े पैमाने पर होता है, सोना भी इनमें से एक है। इन प्रोड्क्ट के घरेलू उत्पादन के अवसरों के लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

भारत में कुल अयस्क भंडार 501.83 मिलियन है

कर्नाटक के रायचूर जिले में स्थित देश की एकमात्र सोने की खनन कंपनी हुट्टी गोल्ड माइन ने 1947 से लगभग 84 टन सोने का उत्पादन किया है। राष्ट्रीय खनिज सूची के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में कुल स्वर्ण अयस्क भंडार 501.83 मिलियन टन अनुमानित है। प्राथमिक सोने के सबसे बड़े संसाधन बिहार (44 प्रतिशत) में स्थित हैं, इसके बाद राजस्थान (25 प्रतिशत), कर्नाटक (21 प्रतिशत), पश्चिम बंगाल (3 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (3 प्रतिशत), और झारखंड (2 प्रतिशत) हैं।