नई दिल्ली, मई 2। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच कॉम्प्रीहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेट (सीईपीए) रविवार को प्रभाव में आ गया, जिससे देश के अधिकांश निर्यात को अमीरात के लिए ड्यूटी-फ्री एक्सेस की अनुमति मिल गई। सीईपीए, जिस पर फरवरी में हस्ताक्षर किए गए थे, से पांच वर्षों के भीतर माल में द्विपक्षीय व्यापार के कुल मूल्य को 100 अरब डॉलर से अधिक और सेवाओं में व्यापार को 15 अरब डॉलर से अधिक तक बढ़ाने की उम्मीद है। वाणिज्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने समझौते को अमल में लाने के प्रतीकात्मक संकेत के तहत रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के तीन निर्यातकों को मूल प्रमाण पत्र सौंपा।

Advertisement

नहीं लगेगा सीमा शुल्क
दुबई के लिए इन खेपों पर समझौते के तहत कोई सीमा शुल्क नहीं लगेगा। सुब्रह्मण्यम ने कहा कि आज, भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सीईपीए लागू हो रहा है। हम भारत से पहली खेप यूएई भेज रहे हैं, जिसे इस समझौते से फायदा होगा। उनके अनुसार यूएई मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, मध्य एशिया और उप-सहारा अफ्रीका का प्रवेश द्वार है।

Advertisement

खूब बढ़ेगा कारोबार
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड और विदेश व्यापार महानिदेशालय ने भी 1 मई से समझौते के संचालन के लिए प्रासंगिक अधिसूचनाएं जारी कीं। व्यापार समझौता पांच साल में दो-तरफा व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने में मदद करेगा, जो कि मौजूदा 60 अरब डॉलर पर है। 100 अरब डॉलर सिर्फ एक शुरुआत है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, यह आने वाले वर्षों में 200 अरब डॉलर और फिर 500 अरब डॉलर हो जाएगा। भारत का यूएई को निर्यात का 99% शून्य शुल्क पर चला जाएगा। जिन चीजों का निर्यात यूएई को होगा उनमें वस्त्र, चमड़ा, जूते-चप्पल, खेलकूद के सामान, प्लास्टिक, फ़र्नीचर और इंजीनियरिंग उत्पाद शामिल हैं। सरकार बहुत सारे व्यापार समझौतों का विश्लेषण कर रही है और उन्हें ठीक करने की कोशिश कर रही है।