Bangalore Mausam Ka Hal: बेंगलुरू का मौसम जल्द बदल सकता है। मौसम विभाग ने इससे जुड़ी बड़ी अपडेट भी शेयर कर दी है। 2 अक्टूबर को न्यूनतम तापमान और अधिकतम तापमान 22.42 डिग्री सेल्सियस और 30.37 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने बताया है कि आज बेंगलुरू में हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। चलिए आपको फटाफट बताते हैं कि बेंगलुरू का मौसस कब बदल सकता है और आने वाले दिनों में कैसा मौसम देखने को मिलेगा।

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बेंगलुरू में कैसा रहेगा इस हफ्ते मौसम?

इस हफ्ते में 2 अक्टूबर को बेंगलुरू में मौसम सुहावना रहेगा। आज शहर में हल्की से मध्यम बारिश के साथ बिजली गिरने की भी संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा शहर में 3 अक्टूबर को बारिश नहीं होगी। इसके बार 4 और 5 अक्टूबर को हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। इसके बाद 6 अक्टूबर को मध्यम बारिश होने की उम्मीद है।

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अपने ठंडे मौसम के लिए बेंगलुरू में अब फिर से गर्मी का अहसास होने लगा है और सोमवार को अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक देखा गया था। केवल बेंगलुरु ही नहीं, हावेरी, बागलकोट सहित राज्य के कई अन्य हिस्सों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा है, जबकि कारवार में 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

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तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री सेल्सियस अधिक है और मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, तापमान में वृद्धि के लिए कम बारिश भी जिम्मेदार है।

मौसम विभाग ने बताया कब बदल सकता है बेंगलुरू में मौसम?

नम्मा कर्नाटक वेदर के मौसम विशेषज्ञ विजय के अनुसार, उत्तर-पूर्व मानसून (एनईएम) का मौसम आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुका है, लेकिन बेंगलुरु के निवासियों को गर्म, धूप और ड्राई दिन के लिए खुद को तैयार रखना होगा। मौसम विभाग ने बताया है कि बेंगलुरू के मौसम के पैटर्न से पता चलता है कि एनईएम का मौसम आ गया है, लेकिन शहर में अभी भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई हैं।

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सितंबर में रिकॉर्ड की गई कम बारिश

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, इस साल बेंगलुरु के लिए सबसे ज्यादा बारिश वाले महीने सितंबर में गर्म मौसम देखने को मिला। बेंगलुरु में मौसम विज्ञान केंद्र के प्रमुख एन पुवियारसन के अनुसार, बेंगलुरु शहर में इस महीने अब तक सिर्फ 1.8 मिमी बारिश हुई है, जबकि 19 सितंबर तक सामान्य 105.8 मिमी बारिश होती है।

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आईएमडी का कहना है कि हवा गर्म मौजूद है और वायुमंडल में कुल पानी की मात्रा कम हो गई है, जिससे बादल नहीं बन पा रहे हैं। इस वजह से कम बारिश देखने को मिली है।