Bank Merger: भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU बैंक) के एक और विलय (मर्जर) की संभावना बढ़ती दिख रही है। देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अगर सरकार बैंक मर्जर का एक और दौर शुरू करती है, तो यह एक अच्छा कदम होगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में कहा था कि भारत को बड़े और विश्वस्तरीय बैंकों की आवश्यकता है और इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) तथा अन्य बैंकों के साथ चर्चा जारी है।

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सरकारी बैंकों के विलय का रास्ता एक बार फिर खुलता नजर आ रहा है। लंबे समय से सरकारी बैंकों के मर्जर की बात चल रही है। हाल ही में SBI ने भी संकेत दिया है कि सरकार अगर एक और राउंड का मर्जर करती है तो यह बुरा विचार नहीं होगा। SBI के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अभी भी कुछ छोटे बैंक मौजूद हैं, जिनका विलय करना फायदेमंद हो सकता है।

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उन्होंने आगे कहा कि यदि मर्जर का अगला चरण आता है, तो यह बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जोर दिया है कि भारत को बड़े और विश्वस्तरीय बैंकों की जरूरत है, और इस दिशा में RBI तथा बैंकों से बातचीत चल रही है। सरकार का लक्ष्य 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है, जिसके लिए अर्थव्यवस्था को 10 गुना बढ़ाकर 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना होगा।

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इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंकिंग क्षेत्र के लोन-टू-GDP रेशियो को 56% से बढ़ाकर 130% करना अनिवार्य है। ऐसे में बड़े और मजबूत बैंक बेहद आवश्यक हैं। वर्तमान में दुनिया के शीर्ष 100 बैंकों में केवल SBI और HDFC बैंक ही भारत से शामिल हैं, जबकि अमेरिका और चीन के कई बैंक शीर्ष 10 में अपनी जगह बनाए हुए हैं।

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पहले चरण में किन बैंकों का हुआ मर्जर

पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने पहले ही दो बड़े चरणों में बैंकों का विलय किया है। 2017 में, SBI ने अपने पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय किया। इसके बाद 2019 में, बैंक ऑफ बड़ौदा ने देना बैंक और विजया बैंक को अपने साथ मिलाया। 2020 में, PNB, केनरा बैंक, इंडियन बैंक और यूनियन बैंक में बड़े विलय हुए, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई। इन फैसलों का उद्देश्य बड़े, सक्षम और विश्व मानकों पर मजबूत बैंक बनाना था।

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सरकार ने 2017 से अब तक दो बड़े चरणों में PSU बैंकों का एकीकरण किया है। 2017 में SBI ने अपने 5 एसोसिएट बैंकों और भारतीय महिला बैंक का अधिग्रहण किया, जिससे SBI का आकार काफी बड़ा हो गया। 2019 में देना बैंक और विजया बैंक को बैंक ऑफ़ बड़ौदा में मर्ज कर दिया गया। 2020 में PNB के साथ यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक ऑफ़ कॉमर्स, केनरा बैंक के साथ सिंडिकेट बैंक, इंडियन बैंक के साथ इलाहाबाद बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ आंध्रा बैंक तथा कॉरपोरेशन बैंक का विलय हुआ।

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IDBI बैंक का हुआ निजीकरण

इसके अतिरिक्त, IDBI बैंक के निजीकरण (प्राइवेटाइजेशन) पर भी कार्य आगे बढ़ चुका है। सरकार और LIC मिलकर अपनी 60.72% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं और अगस्त 2025 में SEBI ने LIC को प्रमोटर से पब्लिक शेयरहोल्डर के रूप में रीक्लासिफाई करने की मंजूरी भी दे दी, जिससे इसकी बिक्री का रास्ता लगभग साफ हो गया है।

सरकार अगले कदम पर पहले से ही काम कर रही है। वित्त मंत्री ने कहा था कि विलय एक तरीका है, लेकिन इसके साथ ही ऐसा वातावरण भी बनाना होगा जिसमें बैंक और तेजी से बढ़ सकें। SBI चेयरमैन का यह समर्थन इस बात को और मजबूत करता है कि देश में PSU बैंक मर्जर 2.0 कभी भी शुरू हो सकता है।

विकसित भारत बनाने की दिशा में हो सकता है बड़ा कदम

अगर ऐसा होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत का बैंकिंग परिदृश्य एक बार फिर बड़े बदलावों से गुजर सकता है। यह बदलाव भारत की आर्थिक ताकत को अगले स्तर पर ले जाने में निर्णायक साबित हो सकता है। भारत का लक्ष्य 2047 तक एक विकसित देश बनना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक और विकास परियोजनाओं के लिए भारी पूंजी की आवश्यकता होगी।

वर्तमान में, बैंकिंग ऋण सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 56% के बराबर है, जिसे बढ़ाकर 130% तक ले जाना होगा। रिपोर्टों के अनुसार, GDP को 10 गुना बढ़ाकर 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए बैंकिंग क्षमता को कई गुना मजबूत करना आवश्यक है। वर्तमान में, केवल SBI और HDFC बैंक ही वैश्विक शीर्ष 100 में शामिल हैं, जबकि चीन और अमेरिका के कई बैंक शीर्ष 10 में आते हैं।