Success Story : आज हम आपको जिस व्यक्ति की सफलता की कहानी बताने जा रहे है। उनका नाम अरोकिस्वामी वेलुमणि हैं। वे थायरो केयर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के अध्यक्ष हैं। उन्होंने 200 वर्ग फुट के किराए के गैरेज में अपने बिजनेस को शुरुआत की थी और आज उनके उद्योग की मौजूदा पूंजी लगभग 3,600 करोड़ रु है। आज के करीब 1,000 लोगों को रोजगार देते है। आइए जानते हैं इनकी सफलता की कहानी।

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वेलुमणि परिवार में सबसे बड़े है

तमिलनाडु में कोयंबटूर के पास एक छोटे से गांव पेनुरी में वेलुमणि का जन्म हुआ था। वेलुमणि के दो भाई और एक बहन है। वेलुमणि परिवार में सबसे बड़े है। वेलुमणि के माता-पिता एक भूमिहीन किसान थे। वेलुमणि के माता-पिता दूसरे को भूमि पर काम करते थे और अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूर्ति करते थे। अपने घर की आर्थिक आर्थिक स्थिति को देखकर वेलुमणि ने स्कूल से निकलकर खेतों में काम करते थे और अपने परिवार की सहायता करते करते थे।

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महीने का वेतन केवल 150 रूपये था

वर्ष 1978 में केमिस्ट के रूप में उनकी पहली नौकरी एक कंपनी में शुरू हुई। वर्ष 1978 में जिसने जेमिनी कैप्सूल टैबलेट बनाई। उनका महीने का वेतन केवल 150 रूपये था। वो जो कंपनी थे। चार वर्षों के बाद बंद हो गई। वैज्ञानिक सहायक के पद के लिए वेलुमणि ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में आवेदन किया। उन्हें मुंबई में वर्ष 1982 में नौकरी मिल गई। जो व्यक्ति गरीबी में अपने जीवन को व्यतीत कर रहा था। उसके लिए 880 रु महीने सैलरी के साथ सरकारी नौकरी पाना किसी विलासिता से कम नहीं था।

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15 वर्ष नौकरी करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी

वे काम भी करते थे। काम करते हुए। उन्होंने अपनी स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद उन्होंने थायराइड जैव रसायन में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। 15 साल उन्होंने नोकरी की। 15 वर्ष नौकरी करने के बाद उन्हें नौकरी थोड़ा सुकून भरी लग रही थी। वेलुमणि कुछ चुनौतीपूर्ण करना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। इस वजह से परिवार दुखी हो गया। लेकिन उनकी पत्नी ने उनका साथ दिया।

आज भी हर दिन लगभग 50 हजार सैंपल आते है

अपनी भविष्य निधि से वर्ष 1995 में 1 लाख रु की राशि से दक्षिण मुंबई के भायखला में 200 वर्ग फुट के किराए के गैरेज लिया और थायरोकेयर की शुरुआत की। शुरुआत में उनको काफी अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनका बिजनेस बढ़ता गया। वर्ष 1998 में उनके पास 15 कर्मचारी थे और उन्होंने 1 करोड़ रु का बिजनेस किया था। थायरोकेयर ने कुछ समय के बाद थायराइड परीक्षण के अलावा भी कई सारे परीक्षण करना शुरू कर दिया। थायरोकेयर जो मरीजों से या अस्पतालों से रक्त और सीरम के नमूने एकत्र करती हैं। इसके बाद इस नमूने को परिक्षण के लिए ले जाया जाता है। आज हर दिन लगभग 50 हजार सैंपल आते है। जिसमें करीब 80 प्रतिशत थायरॉइड टेस्ट होते हैं।