नयी दिल्ली। एक बार फिर किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। पंजाब और हरियाणा के किसान नये 3 कृषि कानूनों के खिलाफ जम कर विरोध कर रहे हैं। किसान अपनी मांगों को लेकर अक्सर ही सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए उतरते हैं। मगर कुछ ऐसे भी किसानों की कहानियां सुनने को मिलती हैं, जिन्होंने लाखों-करोड़ों रु की कमाई कर दूसरे किसानों के लिए एक मिसाल कायम की है। दरअसल कुछ किसान परंपरागत खेती से हट कर नये तरीकों से किसी नयी चीज की फसल उगाते हैं। इससे उन्हें एक ही झटके में तगड़ा मुनाफा हो जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी ही एक रिटायर पुलिसवाले की जिन्होंने अपनी सर्विस के बाद खेती करने की सोची और करोड़पति बन गए। आज वे सालाना 3 करोड़ रु से अधिक कमाते हैं। इतना ही नहीं आज वे देश के सबसे बड़े आलू किसानों में से एक हैं।
वनइंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पार्थीभाई जेठाभाई चौधरी पहले पुलिसवाले थे और रिटायर होने के बाद उन्होंने खेती को अपना प्रोफेशन चुना। पार्थीभाई गुजरात के डांगिया गांव से आते हैं। 2015 में पार्थीभाई डीएसपी पद पर रहते हुए पुलिस सेवा से रिटायर हुए थे। जबकि उनकी भर्ती एसआई पद पर हुई थी। उन्होंने एक ऐसी चीज की खेती की जो भारत में उत्तर भारत में बहुत आम है। उन्होंने आलू की खेती शुरू की, जिससे उनकी सालाना इनकम 3 करोड़ रु से अधिक है। साथ ही उन्होंने आलू उत्पादन में नया रिकॉर्ड भी बना दिया और वो भी इंटरनेशनल लेवल पर।
पार्थीभाई ने 2004 में नौकरी करते हुए ही खेती की शुरुआत कर दी थी। मगर उन्होंने परंपरागत खेती की जगह प्रोगेसिव खेती का रास्ता चुना। वे दूसरे प्रगतिशील किसानों से भी मिले, जिससे वे आधुनिक खेती के तरीके सीख सकसे। आखिर में उन्होंने आलू उगाने का सोचा। उन्होंने केवल 5 एकड़ से शुरुआत की थी, पर धीरे-धीरे बढ़ते-बढ़ते आज उनकी जमीन 87 एकड़ हो गई है। उन्होंने काफी तकनीकी जानकारी भी ली। आज देश भर से किसान उनसे प्रोग्रेसिव खेती की जानकारी लेने आते हैं।
वैसे तो पार्थीभाई मुख्य तौर पर आलू ही उगाते हैं, मगर अप्रैल-नवंबर तक वे बाजरा और मूंगफली के साथ साथ तरबूज भी उगाते हैं। बता दें कि जिस गांव से ताललुक रखते हैं वो राज्य के बनासकांठा जिले में है। ये जिला आलू किसानों के लिए मशहूर है, जिनकी संख्या एक लाख से भी ज्यादा है। अच्छी बात ये है कि पार्थीभाई आज के समय में न केवल खुद अच्छा पैसा कमा रहे हैं बल्कि उन्होंने 16 अन्य परिवारों को काम भी दे रखा है।
आलू की खपत क्वालिटी चिप्स वगैरह बनाने में होती है। इसके अलावा बनांसकाठा जिले में खाने में इस्तेमाल होने वाला आलू भी उगाया जाता है। पार्थीभाई ने आलू की बढ़िया खेती के लिए नाइट्रोजन, पोटास और बाकी कीटनाशकों से जुड़ी सारी जरूरी जानकारी लेकर ही इस काम में विषेशज्ञता प्राप्त की। मैक्केन फूड्स इंडिया यूनिट, हाइफन फूड यूनिट और बालाजी वेफर्स राजकोट वे कंपनियां हैं जो बनासकांठा जिले से आलू खरीदती हैं।
इस समय पार्थीभाई दुनिया भर में प्रति हेक्टेयर में सबसे ज्यादा आलू उगाने वाले किसान हैं। उन्होंने 2011-12 में प्रति हैक्टेयर में 87 मैट्रिक टन आलू का उत्पादन किया था, जो एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है। बता दें कि पार्थीभाई से पहले ये रिकॉर्ड नीदरलैंड के एक किसान के नाम था। उस किसान ने प्रति हैक्टेयर 54 मैट्रिक टन आलू उगाया था।
पार्थीभाई प्रति एकड़ में 15 से 17 टन आलू उगाते हैं। उनका आलू 22 रु प्रति किलो के रेट पर बिक रहा है। उनका सालाना उत्पादन 15 लाख किलो तक है, यानी उनका सालाना कारोबार हुआ 3.3 करोड़ रु। इसमें 50-60 लाख रु खेती में खर्च होते हैं। बाकी 2.70 करोड़ रु तक उनका मुनाफा होता है।
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