Hui Ka Yan : हाल फिलहाल में आपने चीन में कोरोना की खबरें पढ़ी होंगी। पर एक नयी रिपोर्ट में चीन के अरबपति के लगभग बर्बाद होने की जानकारी आई है। ये हैं संकट में चल रहे चीन के रियल एस्टेट सेक्टर की एक कंपनी के चेयरमैन हुइ का यान। ये एवरग्रांडे ग्रुप के चेयरमैन हैं। हुइ की दौलत 42 अरब डॉलर से घट कर 3 अरब डॉलर रह गयी है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, कभी चीन के सबसे अमीर और सबसे प्रभावशाली दिग्गजों में से एक रहे हुइ की दौलत में बिजनेस और उच्च-स्तरीय राजनीति को पाटने के चलते गिरावट आई। उन्होंने अपनी करीब 93 प्रतिशत संपत्ति खो दी है।
सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड (एसएमएच) की रिपोर्ट के अनुसार कभी एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति रहे एवरग्रांडे ग्रुप के चेयरमैन हुइ की दौलत बहुत अधिक कम हो गई है। इसके अलावा चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (सीपीपीसीसी) से आने वाले लेटेस्ट संकेतों के चलते भी हुइ खुद को राजनीतिक तौर पर तेजी से अलग-थलग देख रहे हैं।
क्या है सीपीपीसीसी
सीपीपीसीसी एक एलीट ग्रुप है जिसमें देश के सरकारी अधिकारी और बिजनेस के सबसे बड़े नाम शामिल हैं। हुइ 2008 से इस राजनीतिक सलाहकार समिति और 2013 से इसकी एलीट 300-सदस्यीय स्थायी समिति का हिस्सा रहे हैं। लेकिन उन्हें पिछले साल कहा गया था कि वे इसकेवार्षिक सम्मेलन में शामिल नहीं हों। असल में उनका प्रॉपर्टी साम्राज्य देश के क्रेडिट संकट का सबसे बड़ा शिकार रहा।
अब वह उन लोगों की नयी लिस्ट में भी शामिल नहीं है जो अगले पांच वर्षों के दौरान मिलकर सीपीपीसीसी का गठन करेंगे। इसे बीते बुधवार को ही जारी किया गया है। मालूम हो कि सीपीपीसीसी के नए सदस्य मार्च में बीजिंग जाएंगे। वे ग्रुप की 14वीं राष्ट्रीय समिति के लिए राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों से लेकर नए कानूनों और देश के विकास पर चर्चा करेंगे।
सीपीपीसीसी एक ओनाररी रिवार्ड की तरह है जो चीनी सरकार अपने देश के वफादार कारोबारियों को देश में योगदान देने के लिए देती है। अब सीपीपीसीसी से बाहर होने वाले हुइ अकेले रियल एस्टेट डेवलपर नहीं हैं, बल्कि रिपोर्ट बताती है कि शिमाओ ग्रुप होल्डिंग्स लिमिटेड के हुइ विंग मऊ, ग्वांगझू आरएंडएफ प्रॉपर्टीज के को-फाउंडर झांग ली और पावरलॉन्ग रियल एस्टेट होल्डिंग्स के होइ किन होंग को भी सीपीपीसीसी से बाहर कर दिया गया है। यह सख्त कदम डेवलपरों के लिए चीन के नये बदलते नजरिए को दर्शाता है। इनमें से कई देश में रियल एस्टेट संकट के बीच दौलत के मामले में वैसे कारोबार नहीं रहे, जो हुआ करते थे।
पैसे को रीडिस्ट्रिब्यूट करने के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 'कॉमन प्रॉस्पेरिटी' जैसे कदम के कारण कई इंडस्ट्रीज का बुरा हाल हुआ है। डेब्ट पर रोक लगाने के लिए रियल एस्टेट सेक्टर के लिए, एक सख्त 'थ्री रेड लाइंस' पॉलिसी को लागू करने से बैंकों, ट्रस्ट फर्मों और लाखों मकान मालिकों को प्रभावित करने वाला संकट बढ़ गया है।
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