Pan Cigarette Kiosk : अकसर आपने कुछ ऐसी चीजों के बारे में सुना होगा, जिनकी कीमत बहुत अधिक होती है या नीलामी के जरिए उनकी कीमत बहुत अधिक हो जाती है। इनमें घड़ियां, पुराने सिक्के या नोट या पेंटिंग आदि जैसी चीजें शामिल होती हैं। पर नोएडा में एक ऐसी चीज के लिए बहुत तगड़ी बोली लगी है, जो कमाई का जरिया तो है, पर उस चीज के लिए जितनी बोली लगी है, उससे हर महीने एक कार खरीदी जा सकती है। ये है एक पान-सिगरेट का खोखा, जिसे हो सकता आप टपरी या गुमती के नाम से जानते हों।

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महंगी हो रही प्रॉपर्टी

पिछले काफी समय से दिल्ली-एनसीआर में महंगाई बढ़ रही है। यहां प्रॉपर्टी भी काफी उछाल मार रही है। ऐसे में इस क्षेत्र में उन लोगों का जीवन-यापन करना बहुत मुश्किल है, जिनकी सैलेरी कम हो। यदि आप ठीक-ठाक पैसा कमाते हैं तो ही आप दिल्ली-एनसीआर के किसी अच्छे इलाके में रह सकते हैं। या आपकी जॉब में तगड़ी कमाई न हो तो आपके पास अच्छा खासा बिजनेस हो। इसके लिए आपको पैसा चाहिए। पर नोएडा में एक पान का खोखा हासिल करना भी बहुत मुश्किल है। क्योंकि यहां हाल ही में एक खोखे के लिए मासिक 3.25 लाख रु की अधिकतम बोली लगी है।

हर महीने आ जाएगी नयी कार
एक पान-सिगरेट के खोखे के लिए 3.25 लाख रु का किराया, आपको हैरान कर सकता है, क्योंकि इतने में हर महीने एक नयी कार खरीदी जा सकती है। मगर एक व्यक्ति ने नोएडा की अट्टा मार्केट में इतने किराए पर एक पान का खोखा खरीदा है। सोचने वाली बात यह है कि अगर कोई इतना किराया दे रहा है तो उसे कमाई की कितनी उम्मीद होगी।। आगे जानते हैं उस व्यक्ति के बारे में जिसने ये खोखा इतने किराए पर लिया है।

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अभी शुरू भी नहीं हुआ खोखा

अट्टा मार्केट का मेट्रो स्टेशन है सेक्टर-18। जब आप इस मेट्रो स्टेशन के बाहर आएंगे तो आपको ढेर सारे खोखे देखने को मिलेंगे। एक रिपोर्ट के अनुसार इनमें K सीरीज के खोखे काफी महंगे हैं। यानी उनका किराया बहुत अधिक है। इनमें सबसे महंगा खोखा बताया जा रहा है K-3। यही वो खोखा है, जिसके बारे में हम इस बात कर रहे हैं। मजे की बात यह है कि ये अभी तक चालू भी नहीं हुआ है। इसका किराया है सवा 3 लाख रु।

किसने लिया इतना महंगा खोखा

इस खोखे के लिए जिसने बोली लगाई है वो हैं सोनू झा। उनके पिता दिगंबर झा करीब 25 साल से चाय की टपरी लगा रहे हैं। अब सोनू ने एक नये खोखे के लिए सबसे बड़ी बोली लगाई। दिगंबर बिहार के दरभंगा से आते हैं। वे करीब 25 साल पहले 1997-98 में कामकाज की तलाश में नोएडा आए थे। वे पान, बीड़ी-सिगरेट बेचते हैं। उनकी चाय काफी मशहूर है। दिगंबर के बेटे ने इतनी महंगी बोली लगाई, पर उन्हें कोई रौना नहीं हैं।

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बेटा संभाल लेगा

इस खोखे के साथ सोनू को इसके आसपास की कुछ जगह भी मिलेगी। जहां तक खोखे की बात है तो दिगंबर को विश्वास है कि उनका बेटा इसे संभाल लेगा।