Akasa Airline: देश में हवाई यात्रा करने वाले लोगों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। अब Akasa Air की फ्लाइट से सफर करने पर यात्रियों को थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। एयरलाइन ने घोषणा की है कि अब टिकट बुकिंग पर फ्यूल सरचार्ज लिया जाएगा। कंपनी के अनुसार यह नया चार्ज 15 मार्च से लागू हो गया है और इसी तारीख से की जाने वाली सभी नई बुकिंग पर यह अतिरिक्त चार्ज जोड़ा जा रहा है।

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एयरलाइन का कहना है कि हाल के समय में विमान ईंधन की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से कंपनी की संचालन लागत बढ़ गई है और उसे यह कदम उठाना पड़ा है।

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जेट फ्यूल महंगा होने से बढ़ी परेशानी

एविएशन सेक्टर में जेट फ्यूल यानी ATF का खर्च बहुत बड़ा माना जाता है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का लगभग 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा केवल फ्यूल पर ही खर्च होता है।

ऐसे में जब ईंधन की कीमत बढ़ती है तो एयरलाइन कंपनियों के लिए अपनी सर्विसें पहले की कीमत पर चलाना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि कंपनियां टिकट पर फ्यूल सरचार्ज जोड़कर बढ़ती लागत को संभालने की कोशिश करती हैं।

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अन्य एयरलाइंस भी उठा चुकी हैं कदम

अकासा एयर से पहले देश की दो बड़ी एयरलाइंस भी अपने टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज लागू कर चुकी हैं। Air India ने 12 मार्च से अपने टिकटों में यह अतिरिक्त चार्ज जोड़ना शुरू किया था। इसके बाद IndiGo ने भी अपने टिकटों पर इसी तरह का चार्ज लागू कर दिया। अब अकासा एयर के इस फैसले के बाद घरेलू हवाई यात्रा की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

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लंबा रूट लेने से बढ़ रहा खर्च

मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण कई एयरलाइंस को कुछ संवेदनशील हवाई क्षेत्रों से बचते हुए उड़ान भरनी पड़ रही है। इसके चलते विमानों को पहले से लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।

जब विमान ज्यादा दूरी तय करता है तो फ्यूल की खपत भी बढ़ जाती है। साथ ही उड़ान का समय भी बढ़ जाता है, जिससे एयरलाइन का ऑपरेशन खर्च और ज्यादा हो जाता है।

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यात्रियों को रखना होगा बजट का ध्यान

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले समय में जेट फ्यूल की कीमतें कम नहीं हुईं तो हवाई टिकट के दाम और बढ़ सकते हैं। इसलिए जो लोग आने वाले दिनों में फ्लाइट से यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें टिकट बुक करते समय अपने बजट का थोड़ा ज्यादा ध्यान रखना पड़ सकता है।

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फिलहाल एयरलाइंस का कहना है कि यह फैसला सिर्फ बढ़ती लागत को संभालने के लिए लिया गया है और हालात सामान्य होने पर किरायों में राहत भी मिल सकती है।