AI Vs Human Workers: माइक्रोसॉफ्ट ने अपने ज्यादातर डायरेक्ट क्लाउड कोड लाइसेंस रद्द करना शुरू कर दिया है और इसके बजाय अपने इंजीनियरिंग कर्मचारियों को GitHub Copilot CLI की ओर मोड़ दिया है। यह बदलाव तब आया है, जब इस टेक्नोलॉजी दिग्गज ने अपने हजारों डेवलपर्स, प्रोजेक्ट मैनेजर्स, डिजाइनर्स और दूसरे कर्मचारियों के लिए क्लाउड कोड का एक्सेस खोले हुए सिर्फ छह महीने ही हुए थे। उस समय कंपनी ने AI-असिस्टेड कोडिंग के साथ बड़े पैमाने पर प्रयोग करने को बढ़ावा दिया था।

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इसे अपनाने की रफ्तार काफी तेज और उत्साहजनक थी। शायद, यह रफ्तार कुछ ज्यादा ही तेज थी। The Verge की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिस बड़े पैमाने पर कर्मचारियों ने इस टूल को अपनाया, उसी वजह से अब कंपनी को उस टेक्नोलॉजी से पीछे हटना पड़ा है, जिस पर उसके अपने ही इंजीनियर निर्भर हो गए थे।

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इस फैसले से एंथ्रोपिक के साथ माइक्रोसॉफ्ट के बड़े कमर्शियल रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ता। कंपनी की फाउंड्री डील, जिसमें एंथ्रोपिक में 5 अरब डॉलर तक का निवेश शामिल है और जो फाउंड्री के ग्राहकों को क्लाउड मॉडल्स तक पहुंच देती है जो बरकरार है। साथ ही, Azure कंप्यूट क्षमता खरीदने के लिए Anthropic की 30 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता भी बनी हुई है।

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Uber ने 2026 का पूरा AI बजट चार महीनों में ही खर्च किया

Microsoft अकेला ऐसा मामला नहीं है। Uber के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर, प्रवीण नेपल्ली नागा ने अप्रैल में 'The Information' को बताया कि इस राइड-हेलिंग कंपनी ने साल के सिर्फ चार महीनों के अंदर ही 2026 के लिए AI कोडिंग टूल्स का अपना पूरा बजट खत्म कर दिया था। यह खुलासा इसलिए भी ज्यादा चौंकाने वाला है, क्योंकि Uber AI टूल्स को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए काफी सक्रिय था। उसने टीमों को उनके AI टूल के इस्तेमाल के आधार पर रैंक करने के लिए अंदरूनी लीडरबोर्ड भी लगाए थे।

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दोनों कंपनियों में दिख रहा यह पैटर्न एक ऐसे तनाव की ओर इशारा करता है, जिस पर वर्कप्लेस AI से जुड़ी चर्चाओं में बहुत कम ध्यान दिया गया है। कंपनियां अपने कर्मचारियों पर इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के लिए जितना ज्यादा जोर डालती हैं, लागत उतनी ही तेजी से बढ़ती है।

AI इतना महंगा क्यों पड़ रहा है?

इस समस्या की जड़ में यह बात है कि AI कंप्यूटिंग की कीमतें कैसे तय की जाती हैं। Fortune के अनुसार, बड़े लैंग्वेज मॉडल 'टोकन' के हिसाब से चार्ज करते हैं। टोकन टेक्स्ट की वह सबसे छोटी इकाई है जिसे मॉडल प्रोसेस करता है और बनाता है। इस मॉडल के तहत, ज्यादा कुशलता और ज्यादा इस्तेमाल-दोनों में आर्थिक रूप से कोई फर्क नहीं होता। दोनों ही कुल खर्च को बढ़ा देते हैं।

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कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां टोकन की खपत को बढ़ाने के लिए एक्टिव रूप से जोर दे रही हैं। Amazon ने अपने कर्मचारियों को "tokenmaxx" करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इस शब्द का मतलब है कि जितना हो सके उतने ज्यादा AI टोकन का इस्तेमाल किया जाए। Meta में, एक कर्मचारी ने "क्लाउडोनॉमिक्स" नाम का एक अंदरूनी ट्रैकिंग टूल बनाया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन से कर्मचारी AI का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।

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गोल्डमैन सैक्स ने अनुमान लगाया है कि एजेंटिक AI सिस्टम-जो किसी एक सवाल का जवाब देने के बजाय कई चरणों में अपने आप काम करते हैं- 2030 तक टोकन की खपत में 24 गुना बढ़ोतरी कर सकते हैं। जैसे-जैसे कंपनियां बड़े पैमाने पर AI एजेंटों को तैनात करेंगी, यह खपत बढ़कर हर महीने 120 क्वाड्रिलियन टोकन तक पहुंच सकती है।