नयी दिल्ली। टेलीकॉम कंपनियों के अच्छे दिन आने का नाम नहीं ले रहे हैं। तिमाही में हो रहे घाटे के बाद एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को एजीआर ने बहुत परेशान किया है। दोनों कंपनियों को कुल 92000 करोड़ रुपये का एजीआर चुकाना है। एजीआर यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू एक यूसेज और लाइसेंस चार्ज है, जो दूरसंचार विभाग टेलीकॉम ऑपरेटरों से वसूलता है। एजीआर को लेकर एक विवाद भी रहा है। दूरसंचार विभाग के मुताबिक एजीआर किसी टेलीकॉम कंपनी की कुल आय पर होनी चाहिए, जिसमें जमा ब्याज या संपत्ति बेचने सहित होने वाली आय भी शामिल हों। वहीं टेलीकॉम कंपनियाँ सिर्फ टेलीकॉम सेवाओं की आमदनी पर एजीआर लगाये जाने की वकालत करती रही हैं। ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया, जहां फैसला दूरसंचार विभाग के पक्ष में आया। अब टेलीकॉम कंपनियों को सुप्रीम से एक और झटका लगा है।
एयरटेल और वोडाफोन ने रिव्यू पिटीशन खारिज होने के बाद संशोधन याचिका दाखिल की थी, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शुक्रवार को इन कंपनियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया है अदालत ने यह भी पूछा कि 23 जनवरी 2020 की समयसीमा के बावजूद टेलीकॉम कंपनियों ने बकाया एजीआर क्यों नहीं चुकाया। अब टेलीकॉम कंपनियों को 17 मार्च 2020 तक एजीआर का भुगतान करने का वक्त दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 24 अक्टूबर के अपने फैसले में ही दूरसंचार विभााग के पक्ष में फैसला दे दिया था।
सरकार ने अपने 23 जनवरी के उस आदेश को भी वापस ले लिया है जिसमें उसने टेलीकॉम कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया था। सरकार ने बकाया राशि का भुगतान करने के लिए अदालत द्वारा निर्देशित समय सीमा को पूरा करने में विफल रहने पर टेलीकॉम कंपिनयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न करने का फैसला किया था। मगर सरकार ने अपना फैसला बदल लिया है। दूरसंचार विभाग ने कहा है कि उसे सर्वोच्च न्यायालय के 24 अक्टूबर के फैसले के अनुपालन में तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश है।
भारती एयरटेल 20 फरवरी तक दूरसंचार विभाग को बकाया एजीआर में से 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी। वहीं शेष राशि 17 मार्च से पहले जमा की जायेगी। एयरटेल ने यह बात दूरसंचार विभाग को लिखे एक पत्र में कही है। साथ ही एयरटेल ने यह भी कहा है कि 22 सर्किलों में बकाया की गणना करने के लिए कंपनी को थोड़ा समय चाहिए। एयरटोल को विश्वास है कि जल्दी ही मूल्यांकन करके और उच्चतम न्यायालय की सुनवाई की अगली तारीख से पहले शेष राशि का भुगतान कर दिया जायेगा। कंपनी का कुल बकाया 35,586 करोड़ रुपये है।
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