नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते देश में लॉकडाउन की घोषणा करनी पड़ी है। लॉकडाउन के दौरान देश में कारोबारी गतिविधियां पूरी तरह से ठप हो गई हैं। न लोग कहीं आ या जा सकते हैं, न ही फैक्टरियों में उत्पादन हो रहा है। ऐसे में देश और कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। जानकारों का कहना है कि यह नुकसान काफी लम्बे समय तक लोगों को उठाना पड़ेगा। लेकिन ऐसे में कुछ अच्छा भी हो सकता है। देश के एक नामीगिरामी शख्स ने कहा है कि लॉकडाउन के चलते देश में रियल स्टेट की कीमतों में कमी आ सकती है। अगर यह बात सच साबित होती है तो न केवल कमर्शियल प्रॉपर्टी बल्कि मकान और फ्लैट के रेट में भी भारी कमी आ सकती है।
हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) के चेयरमैन दीपक पारेख ने कहा है कि कोराना वायरस के बाद लागू किए गए लॉकडाउन के बाद देश में रियल एस्टेट की कीमतों में 20 फीसदी तक की कमी आ सकती है। पारेख के मुताबिक, शेयर बाजार ने भी अभी अपना निचला स्तर नहीं देखा है। इसमें शायद और गिरावट आ सकती है।
दीपक पारेख ने राज्य सरकारों, भारतीय रिवर्ज बैंक और डेवलपर कम्युनिटी को कुछ सलाह भी दी है। उनका कहना है कि अगर उनकी बातों का ध्यान रखा गया तो रियल एस्टेट सेक्टर फाइनेंशियल और इकोनॉमिक क्राइसिस से उबर सकता है। दीपक पारेख ने कहा कि डेवलपर्स को हालात से समझौता करना चाहिए और अपना फोकस परियोजनाओं को पूरा करने पर लगाना चाहिए।
-प्रवासी मजदूरों को जल्द से जल्द वापस लाकर काम शुरू करना चाहिए। डेवलपर्स को मजदूरों को कुछ इंसेंटिव देना चाहिए ताकि लौटने के बाद उनकी मुश्किल कम हो।
-राज्य सरकार को कम से कम कुछ समय खासकर सितंबर-अक्टूबर के दौरान प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के स्टांप ड्यूटी से कुछ छूट देना चाहिए।
-राज्य सरकार को टीडीआर व यूएलसी जैसे चार्ज के पेमेंट चरणबद्ध तरीके से करने की अनुमति देना चाहिए।
-डेवलपर को बैंकर्स के साथ लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप बनाना चाहिए।
-लोग मोरोटोरियम की सुविधा लेने से पहले अपनी क्षमता और रणनीति का आकलन करें।
-डेवलपर अपना फोकस परियोजनाओं को पूरा करने पर रखें। यहां तक कि नई परियोजनाओं को अगर टालकर भी पुरानी परियोजनाओं को पूरा करना चाहिए।
-रियल्टी कंपनियों को कॉरपोरेट गवर्नेंस बढ़ाना चाहिए, इससे कम्युनिटी सपोर्ट बढ़ेगा।
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