Adani-Hindenburg Case : अडानी-हिंडनबर्ग मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित छह सदस्यीय पैनल ने सीलबंद कवर में रिपोर्ट सौप दी है। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को आठ मई को सौंपी गई है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले की सुनवाई 12 मई को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के सामने होगी। अभी तक यह क्लियर नहीं है कि एक्सपर्ट पैनल ने कोई विस्तार मांगा है या अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की है।

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अमरीकी शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के मद्देनजर, सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ( सेबी ) को अडानी ग्रुप के द्वारा प्रतिभूति कानून के किसी भी उलंघन की जांच करके का निर्देश दिया था।

इसके वर्तमान नियामक ढांचे के आकलन के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश न्यायमूर्ति ए एम सप्रे की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय समिति को बनाने का आदेश दिया था।

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इस पैनल जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश न्यायमूर्ति ए एम सप्रे कर रहे है इसमें पूर्व बैंकर केवी कामथ और ओपी भट्ट, वकील सोमशेखर सुंदरसन, इंफोसिस के को फाउंडर नंदन नीलेकणि और हाई कोर्ट के जज जेपी देवघर शामिल है।

6 सदस्यीय पैनल के नियमों को मजबूत करने और हाल ही के दिनों में अस्थिरता के खिलाफ से इंडियन इन्वेस्टर्स की रक्षा के लिए सिफारिश करने के लिए अनिवार्य किया था।

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सेबी ने हाल ही में अडानी ग्रुप पर लगे आरोपों की जांच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 6 महीने का वक्त मांगा था। दोनों ही पैनल से 2 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट को जमा करने की उम्मीद थी।

2 मई को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी थी लेकिन शनिवार को सेबी ने एक्सटेंशन के लिए आवेदन दिया।

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24 जनवरी के महीने में अमरीकी शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग ने अडानी ग्रुप पर लेखांकन में गड़बड़ी और रेवेन्यू और स्टॉक्स की कीमत बढ़ाने के आरोप लगाए थे।