नई दिल्ली। कोरोना महामारी के बाद दुनिया के ज्यादातर देशों में लॉकडाउन लागू होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था बड़े खतरे का सामना कर रही है। कई देशों में कारोबार तबाह हो चुका है, तो कई देश वैश्विक मांग में कमी के चलते परेशान है। हालांकि अर्थशास्त्री सुझाव तो तमाम दे रहे हैं, लेकिन वर्ल्ड बैंक का मानना है कि यह हालात दूसरे विश्व युद्ध से भी ज्यादा खतरनाक हैं। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि दुनिया भर में फैली कोरोना महामारी और उसकी वजह से लागू लॉकडाउन के चलते ग्लोबल इकोनॉमी पर भारी दबाव बना हुआ है।

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सोमवार को जारी ग्लोबल इकोनॉमी प्रॉसप्रेक्ट रिपोर्ट की प्रस्तावना में वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष डेविड मलपस ने कहा है कि कोरोना महामारी की वजह से पूरी दुनिया में पैदा हुई मंदी 1870 के बाद पहली ऐसी मंदी है, जो किसी महामारी के चलते उतपन्न हुई है। डेविड मलपस ने आगे कहा है कि जिस गति और गहराई से इस संकट ने हमला किया है उसको देख कर लगता है कि इससे निजात मिलने में हमें काफी चुनौंतियों का सामना करना पड़ेगा और इससे निपटने के लिए दुनियाभर के पॉलिसी मेकरों को अतिरिक्त प्रयास करने पड़ेंगे। डेविड मलपस ने आगे यह भी कहा कि तमाम उभरते और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में एक बड़ी आबादी के लिए प्रभावी वित्तीय कदम उठाना काफी चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि इन देशों कि कार्यशील आबादी का एक बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।

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वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना महामारी की वजह से मांग और आपूर्ति, ट्रेड और फाइनेंस को भारी मार पड़ने के चलते विकसित अर्थव्यवस्थाओं में 2020 में 7 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोरोना की मार उन देशों को सबसे ज्यादा पड़ी है जो ग्लोबल ट्रेड, टूरिज्म, कमोडिटी एक्सपोर्ट और एक्सटर्नल फाइनेसिंग पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोरोना की मार दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह से पड़ेगी लेकिन यह बात साफ है कि एक लंबे समय तक मानवता इस चोट से नहीं उबर पाएगी। वर्ल्ड बैंक की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 1870 से अब तक ग्लोबल इकोनॉमी को 14 बार मंदी का सामना करना पड़ा है। इसमें 1876, 1885, 1893, 1908, 1914, 1917-21, 1930-32, 1938, 1945-46, 1975, 1982, 1991, 2009 और 2020 की मंदियां शामिल है।

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