8th Pay Commission: एक करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत देते हुए केंद्र ने कहा है कि वह 8वें वेतन आयोग के मामले में राज्य सरकारों के साथ सक्रिय रूप से परामर्श कर रहा है और पैनल के गठन के संबंध में जल्द ही घोषणा की उम्मीद की जा सकती है।

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भारतीय मजदूर संघ (BMS) से एसोसिएट औद्योगिक महासंघों के टॉप बॉडी (Apex of industrial federations), सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय परिसंघ (जीईएनसी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने पिछले महीने केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और सरकारी कर्मचारियों के समक्ष 8वें वेतन आयोग के अमल में देरी सहित अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की।

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8वें वेतन आयोग की घोषणा इस वर्ष जनवरी में की गई थी और तब से इसमें कोई खास प्रगति नहीं हुई है, क्योंकि कर्मचारी उत्सुकता से प्रमुख पैनल सदस्यों की नियुक्ति और पैनल के लिए संदर्भ की शर्तों (TOR) को अंतिम रूप दिए जाने का इंतजार कर रहे हैं।

इन मुद्दों पर हुई बात

डेलिगेशन ने 4 अगस्त को मंत्री के साथ अपनी बैठक में 8वें वेतन आयोग में देरी, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) और एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को खत्म करने और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल करने, कोविड-19 के दौरान रोके गए डीए बकाया (18 महीने) को जारी करने जैसे कई मुद्दे उठाए।

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आठवें वेतन आयोग से क्या उम्मीद करें?

  • वेतन बढ़ोतरी- 30-34% अनुमान है।
  • न्यूनतम मूल वेतन- 34,500 रुपये से बढ़कर लगभग 41,000 रुपये हो सकता है।
  • भत्ते- विशेष कर्तव्य भत्ता और क्षेत्रीय भत्ता जैसे कुछ भत्ते समाप्त किए जा सकते हैं।
  • संशोधित डीए, एचआरए और टीए- मुद्रास्फीति के अनुरूप समायोजित किए जाएंगे।

कितनी बढ़ सकती है सैलरी?

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह कारण 1.83 और 2.86 के बीच होगा, जिसका मतलब है कि वेतन में लगभग 13% से 34% की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, 1 जनवरी, 2026 से आठवें वेतन आयोग के लागू होने पर वर्तमान 55% महंगाई भत्ता शून्य हो जाएगा और मूल वेतन में समाहित हो जाएगा। इसका मतलब है कि प्रभावी बढ़ोतरी कम हो सकती है, लेकिन फिर भी लाभकारी रहेगी, क्योंकि पेंशन मूल वेतन और महंगाई भत्ते से जुड़ी होती है।