नयी दिल्ली। पिछले कुछ समय में देश में नौकरियों की कमी एक बड़ा मुद्दा रहा है। विपक्षी पार्टियाँ केंद्र सरकार को इस मामले में घेरती रही हैं। मगर आंकड़ें बताते हैं कि पिछले साल तक केंद्र सरकार में करीब 7 लाख वैकेंसी थीं। यह जानकारी खुद कार्मिक मंत्रालय ने आज ही संसद के सामने दी है। पिछले 5 सालों में यानी 2014 के बाद से केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की संख्या भी घटी है। हालाँकि 2014 में 36.45 लाख स्वीकृत पदों की संख्या में लगभग 1.57 लाख की वृद्धि हुई है। कार्मिक मंत्रालय द्वारा दिये गये आँकड़ों के मुताबिक 1 मार्च 2018 को 38 लाख से अधिक पदों की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले कुल 31.18 लाख कर्मचारी नियुक्त थे, जबकि 2014 में यह संख्या 32.23 लाख थी। पिछले 5 सालों में सरकार का सैलेरी बिल भी बढ़ा है। सरकारी सैलेरी बिल 2014-15 में 1,24,317 करोड़ रुपये से बढ़ कर 2017-18 में 1,90,529 करोड़ रुपये रहा। हालाँकि इस बिल में यात्रा भत्ता, प्रोडक्टिविटी बोनस, मानदेय और छुट्टियों के बदले भुगतान शामिल नहीं है।

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किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा खाली पद
केंद्र सरकार के सबसे बड़े एम्प्लॉयर विभाग रेलवे में 1 मार्च 2018 को करीब 2.5 लाख रिक्तियाँ थीं। आंकड़ों के मुताबिक अगला नंबर रक्षा (सिविल) क्षेत्र का है, जिसमें लगभग 1.9 लाख रिक्तियां मौजूद हैं। रेलवे और रक्षा के अलावा भी बाकी सभी मंत्रालयों में रिक्तियाँ मौजूद हैं। अलग-अलग श्रेणियों में देखें तो कुल 6,83,823 खाली पदों में से 5,74,289 रिक्तियाँ ग्रुप सी, 89,638 रिक्तियाँ ग्रुप बी और 19,896 रिक्तियाँ ग्रुप सी में हैं। साथ ही यह भी जानकारी दी गयी है कि कर्मचारी चयन आयोग ने 2019-20 के दौरान 1,05,338 रिक्तियाँ भरने की प्रोसेस शुरू कर दी है।

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आरक्षित श्रेणियों के लिए भी हैं ढेरों वैकेंसी
कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने पिछले हफ्ते संसद को बताया था कि अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए बैकलॉग आरक्षित रिक्तियाँ भी हैं। कार्मिक मंत्रालय एससी, एसटी और ओबीसी के लिए दस मंत्रालयों और विभागों, जिनमें केंद्र सरकार में 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी हैं, के लिए बैकलॉग आरक्षित रिक्तियों को भरने की प्रोग्रेस की निगरानी कर रहा है। जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया था कि 1 जनवरी 2018 तक अनुसूचित जाति के लिए 7,782, एसटी के लिए 6,903 और ओबीसी के लिए 10,859 पदों को नहीं भरा गया।

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