नयी दिल्ली। 4जी स्पेक्ट्रम ऑक्शन में सरकार को 77800 करोड़ रु मिले हैं। स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए सरकार ने दो दिवसीय बोली का आयोजन किया था, जिसकी शुरुआत सोमवार को हुई थी। ये स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए हाल के सालो में सबसे कम समय रहा। कम समय के बावजूद सरकार को इस स्पेक्ट्रम नीलामी से दूसरी सबसे बड़ी राशि मिलने की उम्मीद है। 2015 की नीलामी में सरकार को 1,13,932 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। आज समाप्त हुई स्पेक्ट्रम नीलामी में रिलायंस जियो इन्फोकॉम, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया (वीआई) ने बोली लगाई। इन कंपनियों का एयरवेव परमिट्स जुलाई में एक्सपायर हो रहा है, जिसे रिन्यू कराने के लिए इन कंपनियों ने ज्यादातर बोली लगाई।

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कैसा रहा था पहला दिन
दूरसंचार ऑपरेटरों ने 4 सालों में पहली बार आयोजित स्पेक्ट्रम नीलामी के पहले दिन सोमवार को 4जी स्पेक्ट्रम के लिए 77,146 करोड़ रु की बोली लगाई। ये सरकार की उम्मीद से काफी बेहतर रहे। सरकार को 45,000 करोड़ रु की ही बोली की उम्मीद थी। वैसे दूरसंचार विभाग (डीओटी) का लक्ष्य 2,308.8 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की नीलामी से कम से कम 3.92 लाख करोड़ रु जुटाना है।

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रेडियो एयरवेव्स के लिए मिली बोलियां
तीनों बड़े टेलिकॉम ऑपरेटर्स, रिलायंस जियो, भारतीय एयरटेल और वीआई, ने नीलामी में हिस्सा लिया। कल 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्, 1,800 मेगाहर्ट्, 2,100 मेगाहर्ट् और 2,300 मेगाहर्ट् बैंड में रेडियो एयरवेव्ज के लिए बोलियाँ प्राप्त हुई। पहले दिन 700 मेगाहर्ट्ज और 2,500 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम नहीं बिके। बता दें कि 2016 में अंतिम बार हुई नीलामी में कुल 7 कंपनियों ने हिस्सा लिया था।

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कैसे हुई नीलामी
सरकार को 2,300 मेगाहर्ट्ज बैंड में 89 फीसदी के लिए बोलियां प्राप्त हुईं, जबकि 800 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम का 65 फीसदी हिस्सा खरीदा गया। 900 मेगाहर्ट्ज, 1,800 मेगाहर्ट्ज और 2,100 मेगाहर्ट्ज एयरवेव्स में क्रमशः 38 फीसदी, 41 फीसदी और 9 फीसदी बोलियां लगीं। सरकार जल्द ही 5जी ट्रायल के लिए एक घोषणा करेगी। मगर 3,300-3,600 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गयी है। इस मेगाहर्ट्ज में स्पेक्ट्रम ट्राई ने 5जी के लिए निर्धारित किया है।

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