नयी दिल्ली। कोरोना संकट आने के बाद आर्थिक गतिविधियां काफी सुस्त हो गई थीं। कई सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुए। सरकार ने मई में देश की आर्थिक हालत और जरूरतमंदों के मद्देनजर आत्मनिर्भर राहत पैकेज का ऐलान किया था। अनलॉक की शुरुआत के बाद आर्थिक गतिविधियां फिर से शुरू होने लगीं। मगर हालात अभी भी पूरी तरह बेहतर नहीं हुए हैं। सरकार ने इसी के मद्देनजर कई राहत भरे उपाय किए ताकि इकोनॉमी में तेजी लाई जा सके। इस बार सरकार ने अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता खर्च, पूंजीगत खर्च और डिमांड को बढ़ाने पर जोर दिया है। इसके लिए आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए 4 बड़े ऐलान किए गए। आइए जानते हैं 4 अहम घोषणाओं के बारे में।
उपभोक्ता खर्च बढ़ाने के लिए सरकार ने 2 प्रस्ताव पेश किए हैं, जिनमें पहला है एलटीसी कैश वाउचर योजना। वित्त मंत्री ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए लीव ट्रेवल कंसेशन या एलटीसी कैश वाउचर स्कीम का ऐलान किया। वित्त मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों को चार साल में एक बार एलटीसी मिलता है। एलटीसी के लिए लाई गई खास योजना के तहत सरकारी कर्मचारी उस वस्तु, जिस पर 12 फीसदी या इससे अधिक जीएसटी लगता हो, ऐसी किसी चीज को खरीदने के लिए अपनी छुट्टियों और 3 बार के टिकट के बदले पैसा ले सकते हैं। कर्मचारी इन पैसों को खर्च करेंगे जिससे इकोनॉमी में उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा। खरीदारी के लिए डिजिटल लेन-देन जरूरी है और कर्मचारियों को जीएसटी बिल भी पेश करना होगा।
उपभोक्ता खर्च बढ़ाने के लिए पेश किए गए प्रस्ताव का दूसरा घटक है केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बिना ब्याज का लोन, जो उन्हें त्योहार पर खर्च करने के लिए मिलेगा। इस स्कीम के तहत कर्मचारियों को 10,000 रुपये का एडवांस दिया जाएगा। केंद्र सरकार ये पैसा कर्मचारियों को प्रीपेड रूपे कार्ड में देगी। बता दें कि कर्मचारियों के लिए ये पैसा 31 मार्च 2021 तक खर्च करना जरूरी है। इस पर कोई ब्याज नहीं लगेगा और इसे 10 किस्तों में लौटाया जा सकता है। मगर कर्मचारी इस पैसे को कैश के रूप में नहीं निकाल सकेंगे। गैजेटेड और नॉन गैजेडेट दोनों तरह के कर्मचारी ये एडवांस ले सकेंगे।
इसके अलावा राज्यों के लिए भी सरकार ने खास लोन स्कीम पेश की है। वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि राज्यों को 12 हजार करोड़ रु ब्याज मुक्त लोन दिया जाएगा। इस लोन की अवधि 50 वर्ष होगी। ये पैसा राज्यों को पूंजीगत खर्चों के लिए दिया जाएगा। मगर इस लोन के अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग हिस्से हैं। जैसे कि पहला हिस्सा नॉर्थ ईस्ट के लिए है, जिसे 1,600 करोड़ रुपये मिलेंगे। वहीं उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के लिए 900 करोड़ रुपये रखे गए हैं। 7500 करोड़ रु की लोन राशि बाकी राज्यों के लिए है। 2,000 करोड़ रुपये का तीसरा हिस्सा उन राज्यों के लिए होगा जिन्होंने आत्मनिर्भर राजकोषीय घाटे के पैकेज में दिए गए 4 में से 3 रिफॉर्म को पूरा किया हो।
वित्त मंत्री ने 25,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट का भी ऐलान किया है, जो बजट 2020 में मौजूद 4.13 लाख करोड़ रुपये के ऊपर होगा। ये पैसा सड़कों, रक्षा, जल आपूर्ति, शहरी विकास और घरेलू रूप से उत्पादित पूंजी उपकरणों पर पूंजीगत खर्च के लिए आवंटित किया जाएगा।
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