नई दिल्ली, दिसंबर 21। भारतीय रुपये के दिन अच्छे नहीं चल रहे हैं। रुपया 2021 को एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा के रूप में खत्म करेगा। ये साल रुपये के लिए कठिन रहा है। दरअसल विदेशी फंड देश के शेयरों से पैसा निकाल रह हैं, जिसका रुपये पर निगेटिव असर पड़ा है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भारतीय मुद्रा में 2.2 फीसदी की गिरावट आई, क्योंकि वैश्विक फंडों ने देश के शेयर बाजार से 4 अरब डॉलर निकाले। ये राशि क्षेत्रीय बाजारों में सबसे अधिक है।
जम कर हुई बिकवाली
विदेशियों ने भारतीय शेयरों से काफी पैसा निकाला है। गोल्डमैन सैक्स ग्रुप इंक और नोमुरा होल्डिंग्स इंक ने भारतीय बाजार के लिए हाल ही में अपने आउटलुक को कम किया। इसके लिए उन्होंने ऊंचे मूल्यांकन का हवाला दिया। इन्होंने यह कदम ऐसे पर उठाया जब ओमिक्रॉन वायरस को लेकर चिंता सभी वैश्विक बाजारों में चल रही है। रिकॉर्ड हाई व्यापार घाटा और फेडरल रिजर्व के साथ केंद्रीय बैंक की अलग नीति ने भी रुपये की 'कैरी अपील' (होल्ड करना) को प्रभावित किया है।
कहां तक गिर कर सकता है रुपया
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार क्वांटआर्ट मार्केट सॉल्यूशंस को उम्मीद है कि मार्च के अंत तक रुपया घटकर 78 रुपये प्रति डॉलर हो जाएगा, जो अप्रैल 2020 में पिछले रिकॉर्ड 76.9088 के निचले स्तर पर पहुंच गया था। जबकि ब्लूमबर्ग के ट्रेडर्स और एनालिस्टों के सर्वेक्षण में रुपये के 76.50 पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया। लगातार चौथे साल घाटा होने पर रुपये में इस साल लगभग 4% की गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय रिजर्व बैंक के लिए चिंता
रुपये में गिरावट भारतीय रिजर्व बैंक के लिए फायदे और नुकसान दोनों का संकेत है। कमजोर मुद्रा कोरोना काल में आर्थिक सुधार के बीच निर्यात को सपोर्ट कर सकती है, तो वहीं यह आयातित मुद्रास्फीति का जोखिम भी पैदा करती है। साथ ही केंद्रीय बैंक के लिए ब्याज दरों को रिकॉर्ड स्तर पर लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल बना सकती है।
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