नयी दिल्ली। अधिक से अधिक भारतीय अपनी खरीदारी की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऑनलाइन रूट अपना रहे हैं। ऐसे में अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों की मांग में जोरदार बढ़ोतरी होती दिख रही है। यह कंपनियाँ सुदूर और दूरदराज के क्षेत्रों में भी अपनी पैंठ बढ़ा रही हैं। हालाँकि आर्थिक मंदी, नकारात्मक भावनाओं और नयी ई-कॉमर्स पॉलिसी से इन कंपनियों का खेल 2020 में बिगड़ सकता है। वहीं एक और चुनौती है जिसका सामना इन कंपनियों को आने वाले साल में करना पड़ेगा और वो है रिलायंस इंडस्ट्रीज का ई-कॉमर्स सेक्टर में प्रवेश करना। रिलायंस जल्दी ही इस सेक्टर में दाखिल होने जा रही है। 2019 में देखें तो त्योहारी सीजन अमेजन और फ्लिपकार्ट के लिए रिकॉर्ड आमदनी का मौका लेकर आया। बेंगलुरु स्थित मार्केट रिसर्च फर्म रेडशीयर कंसल्टिंग के मुताबिक 29 सितंबर से 4 अक्टूबर के दौरान भारतीय ऑनलाइन रिटेलर्स ने 19000 करोड़ रुपये की Gross Merchandise Value बिक्री दर्ज की। अमेजन और फ्लिपकार्ट की मिला कर बिक्री में 90 फीसदी हिस्सेदारी रही।

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रिलायंस से मिलेगी तगड़ी चुनौती

रिलायंस के ई-कॉमर्स सेक्टर में अगले साल दिवाली तक कदम रखने की संभावना है। जानकार मानते हैं कि रिलायंस जिस भी सेक्टर में कदम रखती है तो उस सेक्टर में यह कदम जमाने के लिए भारी डिस्काउंट देती है। वैसे यह चीज जियो के मामले में भी देखी गयी है। रिलायंस दिवाली तक ग्रॉसरी सेग्मेंट में प्रवेश कर सकती है। वैसे तो इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गयी है। मगर जानकार मानते है कि रिलायंस तगड़ी एंट्री करेगी। ऑनलाइन रिटेल सेक्टर में रिलायंस रिटेल की एंट्री अमेजन और वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली दिग्गज कंपनी बाजार में बड़े पैमाने पर बदलाव लाने के लिए अच्छी तरह से तैयार है।

ये है रिलायंस रिटेल की स्थिति

रिलायंस रिटेल रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडरी है, जो 6600 से अधिक शहरों और कस्बों में 10,415 स्टोरों का संचालन करती है। इसके स्टोरों में हर साल 50 करोड़ से अधिक लोग आते हैं। अपनी इस मजबूत स्थिति के चलते रिलायंस के लिए देशव्यापी स्तर पर ई-कॉमर्स कारोबार का विस्तार करना काफी आसान होगा। रिलायंस रिटेल ने अपने कर्मचारियों के बीच बीटा परीक्षण के लिए अपनी फूड और किराना ऐप पहले ही लॉन्च कर दी है। बढ़ते स्मार्टफोन, 4 जी नेटवर्क के लॉन्च और उपभोक्ता पूँजी में वृद्धि के चलते इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन के अनुसार भारतीय ई-कॉमर्स बाजार के 2026 तक बढ़ कर 200 अरब डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है।

नयी ई-कॉमर्स नीति होगी चुनौती

रिलायंस के अलावा जो सबसे बड़ी चुनौती इन दोनों विदेशी कंपिनयों के सामने आ सकती है वो भारत की नयी ई-कॉमर्स पॉलिसी। दरअसल भारत में बहुत बड़े लेवल पर भारी छूट और सेल पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। एक अनुमान है कि सरकार नयी ई-कॉमर्स पॉलिसी में छोटी-मंझोली कंपनियों को लेवल प्लेइंग फील्ड की सुविधा उपलब्ध दे सकती है। इससे इन्हें लाभ मिलेगा। ग्रॉसरी क्षेत्र में 2020 में काफी ग्रोथ देखी जा सकती है।

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