प्रसिद्ध बिस्किट कंपनी पारले का शुद्ध लाभ बढ़ गया है। पारले ग्रुप का मुनाफा बीते वित्त वर्ष में 15.2 प्रतिशत बढ़ा है। कारोबारी मंच टॉफलर के मुताबिक, पारले बिस्किट को वित्त वर्ष 2019 में 410 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ है, जो पिछले साल 355 करोड़ रुपये का था। कुल रेवेन्यु 6.4 प्रतिशत बढ़कर 9,030 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6% बढ़कर 8,780 करोड़ रुपये हो गया था।

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पारले प्रोडक्ट्स ने अगस्त में संकेत दिया था कि लोगों को विकास की रफ्तार कम करनी होगी और एंट्री-लेवल बिस्कुट की गिरती मांग के बाद 18 फीसदी जीएसटी लगने के बाद उस पर उत्पादन कटौती हो सकती है।

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कुछ महीने पहले ही पारले कंपनी से करीब 10 हजार लोगों की छंटनी की खबर सामने आई थी। कंपनी ने 100 रुपये प्रति किलो या उससे कम भाव वाले बिस्किट पर GST को कम करने की मांग की है। कंपनी का कहना है कि ये बिस्किट 5 रुपये से भी कम कीमत पर बेचे जाते हैं। कंपनी का कहना है कि अगर केंद्र सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना तो कंपनी अपनी फैक्टरियों में काम करने वाले 8 हजार से 10 हजार लोगों की छंटनी कर सकती है।

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इस बारे में कंपनी ने कहा था कि बिक्री में आई भारी गिरावट से काफी नुकसान हो रहा है। कंपनी के पारले-जी, मोनैको और मैरी बिस्किट काफी पसंद किए जाते हैं। कंपनी की औसत बिक्री 10 हजार करोड़ रुपये की है। बता दें कि मौजूदा समय में कंपनी की 10 फैक्टरियों में कामकाज हो रहा है और यहां लगभग 1 लाख कर्मचारी काम कर रहे हैं। कंपनी के पास 125 थर्ड पार्टी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी परिचालन में हैं। बता दें कि कंपनी की कमाई आधे से ज्‍यादा ग्रामीण इलाकों से होती है।

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आपको बता दें कि जीएसटी से पहले 100 रुपये किलो वाले बिस्किट के ऊपर 12 फीसदी टैक्स लगता था। कंपनियों ने उम्मीद जताई थी कि प्रीमियम बिस्किट के ऊपर 12 फीसदी और सस्ते बिस्किट के ऊपर 5 फीसदी जीएसटी सरकार तय करेगी। वहीं सरकार ने जीएसटी लागू होने के साथ ही सभी बिस्किट पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू कर दिया। सरकार के इस फैसले के बाद कंपनियों को बिस्किट के दाम बढ़ाने पड़ गए। वहीं दूसरी ओर बिस्किट और डेरी प्रॉडक्ट्स कंपनी बिटानिया का जून तिमाही में शुद्ध लाभ 3.5 प्रति घटकर 249 करोड़ रुपये हो गया है।