नई द‍िल्‍ली: करोड़ों वरिष्ठ नागरिक फिक्स्ड डिपॉजिट से प्राप्त ब्याज की रकम पर निर्भर हैं। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने लेकिन बुधवार को ग्राहकों को झटका दिया था। जानकारी दें कि एसबीआई ने बुधवार को लोन के लिए ब्याज दरों में कमी करने के साथ ही सीनियर सिटिजनों के लिए 1-2 साल की एफडी की ब्याज दर में .10 फीसदी की कमी की। यह दर 7 फीसदी से कम हो कर अब 6.9 फीसदी हो गई है।

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4 करोड़ सीनियर सिटिजनों के प्रभावित होने की आशंका

दूसरी ओर वहीं बैंक ने बचत खाते में 1 लाख रुपये तक की जमा राशि पर ब्याज दर 3.5 फीसदी से घटाकर 3.25 फीसदी कर दी है। एसबीआई का कहना है कि ब्याज दरों में कटौती से सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी आने की उम्मीद है। बड़ी बात ये है कि एसबीआई के इस कदम के बाद अन्य बैंक भी इस दिशा में कदम उठा सकते हैं। एसबीआई के इस फैसले से करीब 4 करोड़ सीनियर सिटिजनों के प्रभावित होने की आशंका है। एसबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 4.1 करोड़ सीनियर सिटिजनों का खाता होने की बात कही गई थी। इन खातों में 14 लाख करोड़ रुपये जमा होने की बात भी रिपोर्ट में थी।

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15 लाख रु तक की जमा राशि पर टैक्स में छूट

वहीं ऐसे में एफडी की ब्याज दरों में बदलाव होने से इन जमा राशि पर सीधे तौर पर प्रभाव पड़ेगा। जानकारी के अनुसार ऐसी स्थिति में फाइनेंसियल प्लानर्स सीनियर सिटिजनों को थोड़ा रिस्क उठाने और डेट फंड जैसे मार्केट टू मार्केट प्रोडक्ट्स में निवेश करने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, सरकार की तरफ से वरिष्ठ नागरिकों की मदद के लिए सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (एससीएसएस) पेश की गई है। इसमें 15 लाख रुपये तक टैक्स में छूट है। एसबीआई का कहना है कि इसमें 60 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति सिर्फ 15 लाख रुपये तक की जमा राशि पर टैक्स में छूट प्राप्त कर सकते हैं।

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हालांकि जानकारों का मानना है कि सीनियर सिटीजन 15 लाख रुपये एससीएसएस में रख सकते हैं। बाकि राशि को वे सरकार की 7.75 फीसदी जमा योजना में रख सकते हैं। जानकारों के अनुसार मौजूदा स्थिति में डेट म्यूचुअल फंड्स में अधिकतर पैसा आ सकता है क्योंकि यहां अधिक फ्लोटिंग रिटर्न रेट मिल रहा है।