भारत ने इस वित्तीय वर्ष में लगभग 90,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए सभी क्षेत्रों में परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण की एक व्यापक योजना तैयार की है, जिसका उद्देश्य सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए घोषित किए गए राजस्व नुकसान के लिए सरकार की मदद करना है।

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इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स की रिर्पोट के अनुसार एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस योजना में विमानन (aviation) क्षेत्र में 15,000 करोड़ रुपये, बिजली क्षेत्र में 20,000 करोड़ रुपये, शिपिंग में 7,500 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय राजमार्गों में 25,000 करोड़ रुपये और रेलवे की 22,000 करोड़ रुपये की संपत्ति के विमुद्रीकरण का प्लान है।

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अधिकारी ने कहा की प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत की अगुवाई में एक समिति ने सभी नोडल मंत्रालयों के लिए एक समय सीमा तय की है ताकि उनके साथ परामर्श के बाद परियोजनाओं के लिए बोलियां (बिडिंग) आमंत्रित की जा सकें। कैबिनेट सचिव राजीव गौबा पूरी योजना को क्रियांबन कर उसे आगे बढ़ा रहे हैं। अधिकारी ने कहा, सरकार इस कार्य को सफलतापूर्वक ख़त्‍म करने के लिए तेजी से काम कर रही है।

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नीति आयोग भी मंत्रालयों के साथ मिलकर अन्य संपत्तियों की पहचान करेगा और उन परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए इस अभियान पर काम करेगा। बता दें कि आयोग ने प्रत्येक मंत्रालय को लक्ष्य दिए है, सभी मंत्रालय को दिए गए लक्ष्यों पर कार्य की प्रगति और समय को ट्रैक करने के लिए एक डैशबोर्ड विकसित किया है।

तो वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि छह साल के निचले स्तर 5% तक गिरने के बाद आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने के लिए पिछले एक महीने में कई उपायों की घोषणा की है। अकेले कॉरपोरेट टैक्स में भारी कमी से 1.45 लाख करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा।