भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने संशोधित नंबर पोर्टिबिलटी नियम लागू करने की समयसीमा 11 नवंबर तक बढ़ा दिया है और दिसंबर में घोषित नियमों के कार्यान्वयन को टाल दिया और यदि वे पोर्टिंग अनुरोध के बारे में गलत जानकारी देते हैं तो दूरसंचार ऑपरेटरों पर जुर्माना लगाने का सुझाव भी दिया।

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मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा प्रदाताओं और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और सरकार द्वारा प्रदान की गई प्रतिक्रियाओं के अनुसार, ट्राई ने 30 सितंबर से उक्त नियमों के कार्यान्वयन के लिए समयसीमा बढ़ाई है।

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एमएनपी के तहत दूरसंचार उपभोक्ता को अपना पुराना नंबर चालू किए बिना नई सेवाप्रदाता चुनने की सुविधा मिलती है। ग्राहकों के लिए यह सुविधा ज्यादा तेज और आसान बनाने के लिए ट्राई ने अपने नियमों को संशोधित किया है।

आपको बता दें कि पुराने नियमों के अनुसार पहले इस प्रक्रिया में 7 दिन लगते थे। नए नियमों के तहत अब एक ही सेवा क्षेत्र में नंबर पोर्टिबिलिटी के आवेदन पर 2 दिन में कार्रवाई पूरी करनी होगी। दूरसंचार सेवाप्रदाता कंपनियों के और समय मांगने के बाद ट्राई ने अपनी 30 सितंबर की समयसीमा को बढ़ाकर 11 नवंबर कर दिया। बोर्ड ने दिसंबर में इन संशोधित नियमों को जारी किया था।

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बता दें कि ट्राई की योजना पिछले दो वर्षों से लागू कॉल सेवा गुणवत्ता प्रावधानों के परिणाम की समीक्षा करने की है। ट्राई प्रौद्योगिकी में हुए परिवर्तनों को देखते हुए प्रावधानों को बेहतर बनाने की संभावना की तलाश करने के लिए परामर्श पत्र पेश करने वाला है। ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा ने कहा कि सेवा गुणवत्ता प्रावधानों में बदलाव के ठीक दो साल हो गए हैं और तब 4 जी इतना अधिक इस्तेमाल में नहीं था। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नई तकनीकें आ रही हैं।

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इस बारे में शर्मा से पूछा गया था कि उपभोक्ताओं को अभी भी कॉल ड्रॉप से ​​परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे पास दूरसंचार कंपनियों के प्रदर्शन का दो साल का आंकड़ा है। हम इस बात का परीक्षण कर रहे हैं कि वे क्या बेहतर बनाये जाने की जरूरत है और यह परामर्श के जरिये किया जाएगा। हम दो साल का अनुभव संबंधित पक्षों के साथ साझा करेंगे और उनका दृष्टिकोण जानेंगे कि यह बेहतर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस बारे में ट्राई जल्दी ही परामर्श पत्र लेकर सामने आएगा।