पब्लिक डेट पर जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जून 2019 को समाप्त पहली तिमाही में सरकार की कुल देयता 88.18 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गई जो कि तीन महीने पहले मार्च 2019 के अंत में 84.68 लाख करोड़ रुपये थी। रिपोर्ट के अनुसार, जून 2019 के अंत तक सरकार की कुल बकाया देयता में पब्लिक डेट की भागीदारी 89.4 प्रतिशत रही है। यह आंकड़े सार्वजनिक डाटा प्रबंधन सेल (PDMC) की तिमाही रिपोर्ट में सामने आए हैं।

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इसको लेकर रिपोर्ट में कहा गया है, सरकार ने जिन सिक्युरिटीज यानी प्रतिभूतियों के जरिये राशि जुटाई है उनमें लगभग 28.9 फीसदी ऐसी हैं जिनकी मैच्योरिटी अवधि पांच साल से बहुत कम रह गई है। मार्च 2019 के अंत तक सरकारी सिक्युरिटीज को रखने के मामले में 40.3 प्रतिशत भाग कोमर्शियल बैंकों के पास और 24.3 प्रतिशत बीमा कंपनियों के पास था।

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तो वहीं चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में केंद्र सरकार ने 2,21,000 करोड़ रुपये की सिक्युरिटीज जारी की जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 1,44,000 करोड़ रुपये की सिक्युरिटीज जारी की गई थीं। पहली तिमाही में जारी नई सिक्युरिटीज की औसत परिपक्वता (WAM) अवधि 15.86 साल रही है जबकि पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में जारी प्रतिभूतियों की औसत परिपक्वता अवधि 14.18 साल रही थी।

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आपको बता दें कि पहली तिमाही के दौरान सरकारी प्रतिभूतियों के यील्ड में नरमी का रुख देखा गया। यह घटकर औसतन 7.21 प्रतिशत रह गया जो इससे पिछली जनवरी-मार्च 2019 तिमाही में औसतन 7.47 प्रतिशत रहा था। अप्रैल-जून 2019 की अवधि में सरकार ने नकदी प्रबंधन बिल जारी कर किसी तरह की राशि जमा नहीं की। वहीं, सीमांत स्थायी सुविधा सहित तरलता समायोजन सुविधा के तहत रिजर्व बैंक से शुद्ध औसत संपत्ति 17,599.3 करोड़ रुपये जब्त की गई।

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इसके अलावा दस साल की परिपक्वता वाली सरकारी प्रतिभूतियों पर यील्‍ड 29 जून 2019 को 6.88 प्रतिशत पर बंद हुआ था। जहां तक ​​शुद्ध विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की बात है, यह पहली तिमाही में एक साल पहले की इसी अवधि के मुकाबले 51 फीसदी बढ़कर 14.4 अरब डॉलर हो गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 9.5 अरब डॉलर थी। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 28 जून 2019 को 424.7 अरब डॉलर रहा जो पिछले वित्त वर्ष में 29 जून 2018 को 406.1 अरब डॉलर पर था।