आईवीएफ से संबंधित जल्द ही एक गुड न्यूज आ सकती है। जी हां स्वास्थ्य इंश्योरेंस कंपनियां एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में हैं। वे मेडिक्लेम प्लान में संतान पैदा करने की कृत्रिम प्रक्रिया को शामिल कर सकते हैं। इसे आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) कहा जाता है। लंबे समय के इंतजार के बाद कंपनियां इन उपचारों के तरीकों को पॉलिसी धारकों को पेश करने की योजना बना रही हैं।
बता दें कि स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में अक्सर आईवीएफ (IVF) पर होने वाले खर्च शामिल नहीं होते हैं। एक आईवीएफ साइकिल पर लगभग 1.25 लाख रुपये का खर्च बैठता है। बीमा कंपनियां इस खर्च की सीमा तय करने की योजना बना रही हैं। कारण है कि यह एक स्वास्थ्य योजना का हिस्सा होगा।
महिलाओं को प्राकृतिक तरीकों से गर्भधारण करने में समस्या होने पर आईवीएफ ट्रीटमेंट का इस्तेमाल किया जाता है। आईवीएफ एक तरह की टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक है।
बता दें कि आईवीएफ को कवर करने की लागत प्रति साइकिल 2.5 लाख रुपये तक हो सकती है। लगभग 10-15 प्रतिशत दंपति को प्रजनन संबंधी समस्याएं होती हैं।
साथ ही आईवीएफ कवर करने वाले इंश्योरेंस प्लान में साफ बताया जाएगा कि कितने एम्ब्रेरियो-ट्रांसफर के प्रयास कवर होंगे। पहला प्रयास सफल न रहने के बाद अतिरिक्त कितने साइकिल कवर हो सकते हैं, इसकी जानकारी भी होगी।
तो वहीं आईसीआईसीआई लोम्बार्ड में हेड ऑफ राइटिंग संजय दत्त ने कहा, कि आईवीएफ को प्लान्ड तरीके से अंजाम दिया जा सकता है। यही कारण है कि इसे कवर करने को लेकर कंपनियों के लिए हल्का रवैया अपनाती रही हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादा बीमित राशि वाली प्रीमियम पॉलिसियों में यह हिस्सा बनाया जा सकता है। बेसिक हेल्थ प्लान के तहत फर्टिलिटी ट्रीटमेंट को कवर करने की काफी मांग है।
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