नई दिल्ली: आर्थिक मंदी की वजह से कई कंपनी के उत्पादों की बिक्री घटी है। भारत में लगातार आर्थिक सुस्ती का दायरा बढ़ता जा रहा है शहरों के साथ-साथ अब गांवों में भी सुस्ती अछूती नहीं रही है। यू कहें कि भारत में आर्थिक सुस्ती का दायरा बढ़ता जा रहा है। शहरों के साथ गांव भी सुस्ती से अछूते नहीं रहे हैं। गांवों में रोजमर्रा की जरूरतों की मांग तेजी से घट रही है। शहरों में जहां कार और अन्य चीजों की बिक्री कम हो रही है, वहीं दूसरी ओर गांवों में बिस्कुट के बाद अब कपड़ों और हेयर ऑयल की मांग में कमी दर्ज की गई है।
जानकारी दें कि एसबीआई इकोरैप के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस साल जून-जुलाई में ग्रामीण इलाकों में कपड़ों की मांग लगभग जीरो रही है। इसके अलावा गावों में जरूरी हेयर ऑयल की डिमांड घटी है। जानकारी के मुताबिक यह आंकड़े सुस्ती की तरफ इशारा कर रहे हैं।
वहीं बजाज कंज्यूमर के सीईओ सुमित मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था 4.8 प्रतिशत की विकास दर से आगे बढ़ रही है। वहीं ग्रामीण मजदूरी वृद्धि दर में पिछले सालों के मुकाबले बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के हवाले से बात करें, तो साल 2013-14 में ग्रामीण मजदूरी वृद्धि दर 14.6 प्रतिशत थी, जो साल 2018-19 में मात्र 1.1 प्रतिशत रह गई है। इस वजह से उनकी खरीदारी क्षमता में गिरावट दर्ज की गई है। बता दें कि भारत में करीब 65 हजार गांवों में देश के कुल बिकने वाले कंज्यूमर गुड्स के आधे से ज्यादा की बिक्री होती है।
दूसरी तरफ गणपति मंडलों पर भी आर्थिक मंदी का असर अब दिखना शुरू हो गया है। जी हां और इसकी शुरूआत छोटे गणपति मंडलों की स्पांसरशिप में 25 प्रतिशत की आयी कमी में देखने को मिल रही है जबकि बड़े मंडलों पर इसका खास प्रभाव नहीं पड़ा है। बता दें कि महाराष्ट्र के मुंबई में कुल 13 हजार सार्वजनिक मंडल हैं। इसमें से कुल 3,070 बड़े मंडल हैं।
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