वैसे तो सरकार की ओर से हर साल शिक्षकों का वेतनमान बढ़ाया जाता है लेकिन इस बार सरकार नहीं कहीं और से ही पैसे बढ़ाए जाएंगे। शुरुआत बैंगलोर से हुई है जहां बेस्‍ट टैलेंट को अपने साथ जोड़ने के लिए शहर के इंटरनेशनल स्कूल सैलरी का नया रिकॉर्ड बना रहे हैं। इससे बहुत ज्यादा ग्लैमरस नहीं माने जाने वाला टीचिंग का प्रोफेशन फिर से आकर्षक हो गया है।

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बेंगलुरु के इंटरनेशनल स्कूल में टीचर्स पर पैसों की बारिश कर रहे हैं। वाइटफील्ड-सरजापुर रोड स्थित एक इंटरनेशनल स्कूल भारतीय मूल के टीचरों को 7.5 लाख से 18 लाख रुपये सालाना (90,000 रुपये से 1.5 लाख रुपये मासिक) सैलरी दे रहा है। प्रिंसिपल को तो 2.2 लाख अमेरिकी डॉलर (1.5 करोड़ रुपये) सालाना सैलरी दे रहा है। स्कूल के विदेशी शिक्षकों को 60,000 से 90,000 डॉलर सालाना सैलरी मिल रही है। इसके अतिरिक्त मुफ्त में रहने की व्यवस्था, बच्चों की शिक्षा और उनके देश के लिए एक बार का हवाई किराया जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं। इस पहल से दूसरे स्कूलों पर भी असर पड़ा है।

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पब्लिक स्कूलों का एक प्रसिद्ध चेन अपने प्राइमरी टीचरों को 62,000 रुपये से 1.75 लाख रुपये प्रति माह दे रहा है, जबकि प्रिंसिपल को 1.25 लाख से 2.5 लाख रुपये प्रति माह दे रहा है। हालांकि, छप्परफाड़ सैलरी के साथ-साथ स्कूलों ने शिक्षकों की भर्ती के पैमानों को काफी कड़ा कर दिया है। स्कूल डेमो क्लास में छात्रों के फीडबैक को भी शिक्षक भर्ती का अहम आधार बना रहे हैं।

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आपको बता दें कि 7 वें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक प्राइमरी टीचर्स की शुरुआती सैलरी 35,370 रुपये प्रति माह है, लेकिन दिल्ली समेत तमाम शहरों में प्राइवेट स्कूल उसकी अनदेखी कर औसतन 15,000 रुपये सैलरी दे रहे हैं। हकीकत यह है कि केंद्रीय विद्यालय जैसे सरकारी स्कूल निजी स्कूलों की तुलना में बेहतर सैलरी दे रहे हैं। दिल्ली में निजी स्कूलों में 20 साल तक के अनुभव वाले टीचर को औसतन 60 हजार रुपये प्रति माह मिलते हैं, जबकि केंद्रीय विद्यालयों में ऐसे शिक्षकों को 80,000 रुपये प्रति माह वेतन मिलता है।