आपको बता दें कि आरबीआई इस बुधवार को चालू वित्‍त वर्ष की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा जारी करेगा। इसमें नीतिगत दर में लगातार चौथी बार 0.25 प्रतिशत की कटौती की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेतों के बीच केंद्रीय बैंक एक बार फिर से रेपो रेट में कटौती कर सकता है।

Advertisement

उद्योग जगत उम्मीद कर रहा है कि रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी), सिस्टम में निवेश की स्थिति में सुधार और ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए कदम उठा सकती है। बता दें कि एमपीसी की बैठक 5 से 7 अगस्त तक तीन दिन चलेगी। इस बार रिजर्व बैंक की रेपो रेट 5.75 प्रतिशत पर है।

Advertisement

दिसंबर 2018 में शक्तिकांत दास के रिजर्व बैंक गवर्नर का पदभार संभालने के बाद पहली बार फरवरी की मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत कटौती की गई। उसके बाद चार अप्रैल 2019 को और फिर छह जून को हुई मौद्रिक नीति की समीक्षा में 0.25-0.25 प्रतिशत कटौती की गई।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ राजकिरण राय ने कहा कि एमपीसी इस बार भी ब्याज दर में चौथी बार कटौती कर रही है। इस समय वृद्धि को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। मुझे भरोसा है कि केंद्रीय बैंक दरों में कटौती करेगा।

Advertisement

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने कहा कि रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती का चक्र फरवरी 2019 से शुरू किया था। हालांकि, अंतिम उपभोक्ता तक कटौती का लाभ काफी धीमी गति से पहुंच रहा है। सीआईआई ने कहा कि रिजर्व बैंक को नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में आधा प्रतिशत की कटौती करनी चाहिए। इससे प्रणाली में 60,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां उपलब्ध होंगी।

Advertisement

उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा कि वृद्धि दर को प्रोत्साहन के लिए सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने की जरूरत है। इससे निवेश में वृद्धि होगी। साथ ही मुद्रास्‍फीति नियंत्रण में है। ऐसे में कटौती का लाभ तेजी से ट्रांसफर किया जाना चाहिए। एसोचैम ने कहा कि एनबीएफसी के नकदी के संकट को दूर करते हुए ब्याज दर में कटौती से आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा और यात्री और कमर्शियल वाहनों की मांग में इजाफा होगा।