नई द‍िल्‍ली: एयर इंडिया विनिवेश पर पुनर्गठित मंत्री समूह की अगुवाई अब गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। गुरुवार को मि‍ली जानकारी के मुताबकि सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को इस मंत्री समूह से हटा दिया गया है। यह मंत्री समूह एयर इंडिया की बिक्री के तौर तरीके तय करेगा। इसमें अब चार केंद्रीय मंत्री-शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य और रेल मंत्री पीयूष गोयल और नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल होंगे।

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पहली बार मंत्री समूह का गठन जून, 2017 में

आपको बता दें कि एयर इंडिया की बिक्री पर मंत्री समूह का पहली बार गठन जून, 2017 में किया गया था। इस समूह को एयर इंडिया विशेष वैकल्पिक व्यवस्था (एआईएसएएम) का नाम दिया गया। उस समय इस समूह की अगुवाई तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली और इसमें पांच सदस्य कर रहे थे। बात करें अन्य चार सदस्य नागर विमानन मंत्री अशोक गजपति राजू, बिजली एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल, रेल मंत्री सुरेश प्रभु तथा सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी थे।

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वहीं सूत्रों ने बताया कि दूसरी बार मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद समूह का पुनर्गठन किया गया है और गडकरी अब इस समूह का हिस्सा नहीं हैं। हालांकि सूत्रों ने कहा, 'एआईएसएएम का नए सिरे से गठन किया गया है। अब इसमें पांच के बजाय चार सदस्य हैं।' अपने पहले कार्यकाल में मोदी सरकार ने 2018 में एयर इंडिया की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री तथा एयरलाइन के प्रबंधन नियंत्रण के लिए निवेशकों से बोलियां आमंत्रित की थीं।

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बिक्री की प्रक्रिया दिसंबर, 2019 तक पूरा करने का इरादा

परंतु यह प्रक्रिया विफल रही थी और निवेशकों ने एयर इंडिया के अधिग्रहण के लिए बोलियां नहीं दी थीं। उसके बाद सौदे को नियुक्त सलाहकार ईवाई ने इस बारे में रिपोर्ट तैयार की थी कि बिक्री की प्रक्रिया क्यों विफल रही। ईवाई ने अपनी रिपोर्ट में इसकी जो वजहें बताई थीं उनमें सरकार द्वारा 24 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रखना, ऊंचा कर्ज, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विनियम दरों में उतार-चढ़ाव, वृहद वातावरण में बदलाव तथा लोगों के बोली लगाने पर अंकुश आदि हैं। बता दें कि निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) एयर इंडिया की बिक्री के लिए पहले ही नया प्रस्ताव तैयार कर चुका है।

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इसमें कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के मुद्दों को शामिल किया गया है। सूत्रों ने कहा कि इस बार सरकार एयर इंडिया की शतप्रतिशत यानी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री की पेशकश कर सकती है। सरकार का इरादा बिक्री की प्रक्रिया दिसंबर, 2019 तक पूरा करने का है। एक सूत्र ने कहा कि कितनी हिस्सेदारी की बिक्री की जाएगी और रुचि पत्र कब मांगे जाएंगे, इस बारे में निर्णय नवगठित एआईएसएएम करेगा।

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