नई द‍िल्‍ली: गरीब रथ एक्सप्रेस जल्द बंद हो सकती है। जी हां मोदी सरकार गरीब रथ ट्रेन में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। जानकारी के मुताबिक, गरीब रथ ट्रेन को जल्द सुपरफास्ट ट्रेन में बदला जाएगा। इसके साथ ही अब इसके कोचेस में भी बदलाव हो सकता है। इस ट्रेन में पहले जहां 12 कोच (सभी वातानूकूलित) होते थे, वहीं नई ट्रेन में अब 16 कोच होंगे। इसमें जनरल, स्लीपर और एसी कोच भी लगाए जाएंगे। बता दें कि इस बात की जानकारी सीएनबीसी आवाज़ ने सूत्रों के हवाले से दी है। सरकार गरीब रथ ट्रेन को इसलिए बंद कर रही है, क्योंकि इसकी बोगियां 14 वर्ष पुरानी हो गई हैं और इनका निर्माण भी बंद हो चुका है। वहीं, रेल मंत्रालय गरीब रथ की बोगियों को मेल एक्सप्रेस में बदलेगी। मंत्रालय ने इस पर काम करना भी शुरू हो दिया है।

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साल 2006 में हुई थी गरीब रथ एक्सप्रेस की शुरुआत

तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने गरीबों के एसी ट्रेनों में सफर करने का सपना साकार करने के लिए साल 2006 में गरीब रथ एक्सप्रेस की शुरुआत की थी। लेकिन अब मौजूदा सरकार ने गरीब रथ ट्रेनों को मेल एक्सप्रेस में बदल रही है। जानकारी दें क‍ि पहली ट्रेन सहरसा-अमृतसर गरीब रथ एक्सप्रेस थी, जो बिहार के सहरसा से पंजाब के अमृतसर के बीच चलाई गई थी। इस ट्रेन में एसी 3 और चेयरकार कोच थे। गरीब रथ ट्रेनों को मेल एक्सप्रेस ट्रेन में बदलने के पीछे की वजह इस ट्रेन की बोगियों का प्रोडक्शन बंद होना माना जा रहा है। क्यों ये काफी पुरानी हैं। इसकी जगह पर अब आधुनिक बोगियां बनाई जा रही हैं। इसलिए गरीब रथ ट्रेनों को मेल एक्सप्रेस ट्रेन में बदला जाएगा।

आम आदमी के लिए ट्रेन में सफर करना महंगा हो सकता

जानकारी के ल‍िए बता दें फिलहाल आनंद विहार टर्मिनल रेलवे स्टेशन से पटना जंक्शन की गरीब रथ ट्रेन का किराया करीब 900 रुपये है, जबकि मेल एक्सप्रेस ट्रेन के एसी 3 क्लास का किराया 1,300 रुपये के आसपास है। ऐसे में आम आदमी के लिए इन ट्रेन में सफर करना महंगा हो सकता है। इस ट्रेन का किराया अन्य ट्रेनों के एसी क्लास से कम है। इस ट्रेन में प्रत्येक सीट या बर्थ के बीच की दूरी कम है और प्रत्येक कोच में वातानुकूलित डिब्बों की तुलना में अधिक सीटें और बर्थ हैं। गरीब रथ में बैठने के लिए 3 टियर में 78 सीटें होती हैं। यात्रियों को खान-पान और बेड रोल के लिए अलग से भुगतान करना होता है। एक बेड रोल के लिए 25 रुपये देना होता है, जिसमें एक तकिया, एक कंबल और दो चादर होती हैं।

अक्टूबर से ट्रेनों में बढ़ जाएंगी 4 लाख सीटें

रेल से सफर करने वाले यात्रियों के ल‍िए अच्‍छी खबर है। यात्रियों के लिए आने वाले समय में रेल का रिजर्व टिकट अपेक्षाकृत आसानी से सुलभ हो सकता है। इतना ही नहीं रेलवे ऐसे उपाय करने जा रही है, जिनसे अक्टूबर से गाड़ियों में रिजर्व यात्रा के लिए रोजाना 4 लाख से अधिक सीटें (बर्थ) बढ़ेंगी। इसके लिए रेल विभाग ऐसी टेक्नॉलॉजी अपनाने जा रहा है, जिससे डिब्बों में रोशनी और एयर कंडीशनिंग के लिए बिजली को लेकर अलग से पावर कार (जनरेटर डिब्बा) लगाने की जरूरत नहीं होगी। बता दें कि यह जरूरत इंजन के माध्यम से ही पूरी हो जाएगी।