नई दिल्ली: अपनी कमाई को बढ़ाने के लिए रेलवे हर कोशिश कर रहा है। जी हां इतना ही नहीं इसके लिए वह 'गिव इट अप' योजना को लागू करने पर विचार कर रहा है। इसमें यात्रियों से ट्रेन के टिकट पर सब्सिडी छोड़ने के लिए कहा जाएगा। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सीनियर अफसर ने कहा कि रेलवे ने अपनी कमाई बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को 100 दिन का प्लान भेज दिया है। वहीं उन्होंने बताया कि अभी रेलवे यात्रा पर आने वाली लागत का सिर्फ 53 फीसदी ही टिकट के रूप में वसूल करता है। इससे रेलवे पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
रेलवे यात्रा पर आने वाली 43 फीसदी लागत का बोझ खुद उठा रहा है। जानकारी दें कि अधिकारी ने बताया कि रेलवे का जोर यात्रियों को सब्सिडी छोड़ने के लिए प्रेरित करने पर है। इससे पहले सरकार ने रसोई गैस की सिलेंडर पर लोगों से सब्सिडी छोड़ने की अपील कर चुकी है। इसके अच्छे नतीजे मिले हैं। यात्री को रेलवे सब्सिडी और बगैर सब्सिडी वाला टिकट खरीदने का विकल्प देगा। सब्सिडी छोड़ने वाले यात्रियों को टिकट के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। वहीं अधिकारी ने बताया कि सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम (सीआरआईएस) आईआरसीटीसी की वेबसाइट में इसके लिए जरूरी बदलाव करेगा।
हालांकि सूत्रों के मुताबिक, रेलवे को टिकटों की बिक्री से करीब 50,000 करोड़ रुपये की कमाई होती है। वहीं अधिकारी ने कहा, "हमने टिकटों की बिक्री से 2019-20 में करीब 56,000 करोड़ रुपये की कमाई का लक्ष्य रखा है। बता दें कि गिव इट अप स्कीम से इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। अगर यह स्कीम कामयाब रहती है तो कमाई और ज्यादा बढ़ सकती है। अगर सभी यात्री सब्सिडी छोड़ने का फैसला कर लें तो कमाई करीब दोगुनी हो सकती है। रेलवे ने गिव इट अप स्कीम के प्रचार के लिए व्यापक योजना बनाई है। इसे अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों तक पहुंचाया जाएगा। उन्हें टिकट पर सब्सिडी छोड़ने के लिए कहा जाएगा। पूर्व रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने इस योजना के बारे में सोचा था। लेकिन, कई तबकों के विरोध जताने पर इसे छोड़ दिया गया था।
इस बात की भी जानकारी दें कि रेलवे बोर्ड का प्रस्ताव पीएमओ के पास है। इस साल अगस्त तक इसके लागू हो जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार 2014 में सत्ता में आने के बाद लोगों से रसोई गैस पर सब्सिडी छोड़ने की अपील की थी। उनकी अपील के बाद 1.25 करोड़ लोगों ने सब्सिडी छोड़ दी है। हर सिलेंडर के हिसाब से इस पर करीब 300 करोड़ रुपये की बचत होती है, जिसे सालाना 12 सिलेंडर के हिसाब से जोड़ें तो यह 3600 करोड़ रुपये होता है। इतना ही नहीं रेलवे अब इसे टिकट के मामले में आजमाना चाहता है।
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