नई दिल्ली: अगर आपका भी अकाउंट आईडीबीआई बैंक में है तो आपके लिए अच्छी खबर है। जी हां सरकारी से प्राइवेट हुए आईडीबीआई बैंक ने अपने ग्राहकों को तोहफा दिया है। लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के स्वामित्व वाले आईडीबीआई बैंक ने 12 जून को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट में 0.5 से 0.10 फीसदी तक की है। बता दें कि यह कटौती तुरंत प्रभाव से लागू होगी। एमसीएलआर के घटने से आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है। और उसे पहले की तुलना में कम ईएमआई देनी पड़ती है। आपको बता दें कि 6 जून को आरबीआई ने रेपो रेट 0.25 फीसदी घटा दिया था। इसके बाद बैंकों ने ब्याज दरें घटाना शुरू की हैं।
जानकारी दें कि कटौती के बाद बैंक के ओवरनाइट, एक माह और छह माह की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर 0.10 फीसदी घटकर क्रमश: 7.90 फीसदी, 8.15 फीसदी और 8.60 फीसदी रह गई। इसी तरह एक साल की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर 8.95 फीसदी हो गई। इतना ही नहीं बैंक की ओर से ब्याज दर में यह कमी रिजर्व बैंक के रेपो दर में 0.25 फीसदी की कटौती के बाद की गई है। रिजर्व बैंक ने पिछले हफ्ते रेपो दर को 6 फीसदी से घटाकर 5.75 फीसदी कर दिया था।
आपको इस बात से भी अवगत करा दें कि रिजर्व बैंक की तरफ से रेपो रेट में कटौती के बाद एसबीआई ने एक बड़ा फैसला किया। अब एसबीआई ने होम लोन प्रोडक्ट को रेपो रेट से लिंक कर दिया है। इसके अलावा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया कैश क्रेडिट और ओवर ड्राफ्ट की ब्याज दरों में कटौती की है।
जानकारी दें कि ये फैसले 1 जुलाई से प्रभावी हो जाएंगे। बता दें कि एसबीआई ने यह फैसला एक दिन पहले आरबीआई द्वारा मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती के बाद लिया है। एसबीआई के इस फैसले के बाद कैश क्रेडिट व ओवर ड्राफ्ट के लिए ब्याज दर 8 फीसदी हो जाएगा। इस बात की भी जानकारी दें कि बैंक की ओर से ब्याज दर में यह कमी रिजर्व बैंक के रेपो दर में 0.25 फीसदी की कटौती के बाद की गई है। रिजर्व बैंक ने पिछले हफ्ते रेपो दर को 6 फीसदी से घटाकर 5.75 फीसदी कर दिया था। रेपो दर अब यह 9 साल के निचले स्तर पर है। हालांकि पिछली दो बार आरबीआई की इस पहल का ग्राहकों को अधिक नहीं मिला था।
बता दें कि एमसीएलआर को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट भी कहते हैं। इसमें बैंक अपने फंड की लागत के हिसाब से लोन की दरें तय करते हैं। जानकारी दें कि ये बैंचमार्क दर होती है। इसके बढ़ने से आपके बैंक से लिए गए सभी तरह के लोन महंगे हो जाते हैं। मार्जिनल का मतलब होता है कि अलग से या अतिरिक्त। जब भी बैंक लेंडिंग रेट तय करते हैं, तो वे बदली हुई स्थितियों में खर्च और मार्जिनल कॉस्ट को भी कैलकुलेट करते हैं।
बैंकों के स्तर पर ग्राहकों को डिपॉजिट पर दिए जाने वाली ब्याज दर शामिल होती है। एमसीएलआर को तय करने के लिए चार फैक्टर को ध्यान में रखा जाता है। इसमें फंड का अतिरिक्त चार्ज भी शामिल होता है। निगेटिव कैरी ऑन सीआरआर भी शामिल होता है। इसके साथ ही, ऑपरेशन कॉस्ट और टेन्योर प्रीमियम शामिल होता है।
इससे पहले, सरकारी क्षेत्र के ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने विभिन्न अवधि के लोन पर ब्याज दर में कटौती की थी। बता दें कि 11 जून को सरकारी बैंक ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट एमसीएलआर में 0.10 फीसदी तक की थी। इसके बाद बैंक के एक माह और छह माह की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर 0.10 फीसदी घटकर क्रमश: 8.35 फीसदी और 8.60 फीसदी रह गई।
More Articles
- भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें
- Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?
- ITR फाइल करने का आज आखिरी मौका: क्या आज के बाद लगेगा जुर्माना? जानें बचने का तरीका
- US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति
- GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित
- ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान