नई द‍िल्‍ली: जीएसटी प्रक्रिया (GST process) को सरल बनाने की कोशिशें वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने शुरू कर दी है। इसके तहत GST रिफंड की मंजूरी (Refund approval) और प्रोसेसिंग (Processing) दोनों काम एक ही व्यवस्था या प्राधिकरण (अथॉरिटी) (System or authority) करेगा इस बात की जानकारी एक अधिकारी द्वारा दी गयी।

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बता दें कि मौजूदा व्यवस्था में केंद्र और राज्य कर (Central and state taxes) अधिकारियों दोनों से रिफंड की मंजूरी (Refund approval) की जरूरत होती है। लेकिन अगस्त में इस व्यवस्था में बदलाव हो सकता है। इसके बाद दो की जगह एक ही प्राधिकरण GST रिफंड की मंजूरी और उसकी प्रोसेसिंग (Processing) का काम करेगा। जानकारी दें कि राजस्व विभाग इस व्यवस्था पर काम कर रहा है। इसके अनुसार, करदाता को दावा मंजूर होने के बाद कर अधिकारी से पूरा रिफंड (Refund)मिल जाएगा।

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मौजूदा समय में इस प्रॉसेस से होता है काम

इस बात से अवगत करा दें कि वर्तमान में, करदाता के रिफंड (Taxpayer's refund) के दावा करने पर केंद्रीय कर (Central tax) अधिकारी 50 फीसदी दावे का भुगतान कर देता है और बाकी बची राशि का भुगतान राज्य के कर अधिकारियों की जांच-पड़ताल के बाद किया जाता है। GST रिफंड के लिए राज्य कर अधिकारियों (Officials) के पास दावा करने पर भी इसी व्यवस्था का पालन किया जाता है, जिसकी वजह से पूरा रिफंड मिलने में काफी समय लगता है और एक्सपोर्टर्स (Exporter) के सामने नकदी का संकट खड़ा हो जाता है। रिफंड प्रक्रिया (Refund process) में होने वाली इस देरी की समस्या को दूर करने के लिए ही एकल व्यवस्था का प्रस्ताव किया गया है।

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एकल प्राधिकरण है फायदेमंद

जानकारी दें कि एकल प्राधिकरण (Single authorization) यानी सिंगल अथॉरिटी व्यवस्था के तहत, करदाता के राज्य या केंद्र (Single) के कर अधिकारी के समक्ष रिफंड (Refund) का दावा करने के बाद अधिकारी दावे की जांच, मूल्याकंन करके पूरे रिफंड (Refund) (केंद्र और राज्य GST दोनों की हिस्सेदारी) को मंजूरी दे देगा। बाद में आंतरिक खाता समायोजन यानी इंटर्नल अकाउंट एडजस्टमेंट (Internal Account Adjustment) के माध्यम से दोनों टैक्स अथॉरिटी (Tax authority) बाकी बची राशि को समायोजित/व्यवस्थित कर लेंगे।