नई दिल्‍ली: लगभग 200 अमेरिकी कंपनियां (American companies) चीन (china) से भारत (India) में आम चुनावों के बाद अपने विनिर्माण आधार (Manufacturing base) को स्थानांतरित (Moved) करने की मांग कर रही हैं। इस बात की जानकारी एक शीर्ष अमेरिकी-आधारित वकालत समूह ने पीटीआई के साथ एक साक्षात्कार (Interview) में कही गयी है।

Advertisement

बता दें कि यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम (US-India Strategic and Partnership Forum's) (यूएसआईएसपीएफ) के अध्यक्ष मुकेश अघी (Mukesh Aghi) ने पीटीआई को बताया कि कंपनियां उनसे बात कर रही हैं कि वे भारत में निवेश करके चीन का विकल्प कैसे स्थापित करें।

Advertisement

अघी (Aghi) ने कहा कि नई सरकार के लिए यूएसआईएसपीएफ (USISPF) की सिफारिश सुधारों में तेजी लाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency) लाने के लिए होगी। निवेश (Investment) को आकर्षित करने के लिए नई भारत सरकार (New govt. Of india) का एजेंडा (Agenda) क्या होना चाहिए, इसके जवाब में, अघी ने सुझाव दिया कि नई दिल्ली को सुधारों में तेजी लाने, प्रक्रिया में अधिक पारदर्शी होने और अधिक संलग्न होने की आवश्यकता है।

Advertisement

वहीं उन्होंने कहा कि दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए अमेरिका के पूर्व व्यापार प्रतिनिधि मार्क लिंसकोट (Mark Linscott) यूएसआईएसपीएफ की सदस्य (USISPF member) कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। जो भारत को अपने निर्यात (Export) को बढ़ाने और उस दृष्टिकोण से काम करने के लिए क्या करने की आवश्यकता है, और उसके लिए एक सिफारिश के साथ आ रहे हैं।

Advertisement

हालांक‍ि अघी को लगता है कि भारत (India) को अमेरिका (America) के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के बारे में सोचना शुरू कर देना चाहिए क्योंकि इससे चीन से आने वाले सस्ते सामान की चिंता खत्म हो जाएगी। उनका मानना हैं कि यह भारतीय बाजार तक अमेरिका की पहुंच प्रदान करते हुए चीनी सामानों में रुकावट डालेगा और भारतीय कंपनियों (Indian companies) की जीएसपी (GSP) जैसे मुद्दों को कम करते हुए अमेरिकी बाजार (American market) तक अधिक पहुंच होगी।

Advertisement

अघी ने कहा कि उन्होंने सिस्को में आपूर्ति श्रृंखला संचालन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जॉन केर्न (John Kern, Senior Vice President) के नेतृत्व में सदस्य कंपनियों के भीतर एक उच्च-स्तरीय विनिर्माण परिषद का गठन किया है। जो एक दस्तावेज को एक साथ डाल रहे हैं कि भारत को विनिर्माण हब (Manufacturing hub) में बदलने के लिए क्या करना होगा।