नई दिल्ली। शेयर बाजार (stock market) और म्युचुअल फंड (mutual fund) का विस्तार पिछले कई सालों से काफी तेज रहा है, लेकिन दरअसल इसकी शुरुआत काफी पहले से ही हो गई थी। शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (sensex) की स्थापना 1 अप्रैल 1979 को हुई थी। ऐसे में शेयर बाजार (share market) में ग्रोथ को किसी एक व्यक्ति या एक सरकार का योगदान को नहीं माना जा सकता है। लेकिन शेयर बाजार रिटर्न (stock market return) पर चलता है, यानी उसने कितना अच्छा रिटर्न दिया। इस मामले में अगर मोदी सरकार के 5 साल के कार्यकाल की तुलना इससे पहले मनमोहन सिंह के 5-5 साल के 2 कार्यकाल से की जाए तो नतीजे कुछ और ही हैं।
जानें मोदी सरकार के कार्यकाल में कितना रहा रिटर्न (Stock market returns in Modi government)
देश में शेयर बाजार का रिटर्न (return in stock market) जानने के दो पैरामीटर हो सकते हैं। एक मुम्बई शेयर बाजार का सेंसेक्स (Sensex) और दूसरा है नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (nifty)। अगर इन दोनों सूचकांकों का रिटर्न (return) देखा जाए तो मई 2014 से अभी तक मोदी सरकार के कार्यकाल में जहां सेंसेक्स (Sensex) ने करीब 57 फीसदी का रिटर्न (return) दिया है वहीं निफ्टी (nifty) ने 58 फीसदी का रिटर्न दिया है। हालांकि यह आंकड़े हैं, लेकिन इनको अगर आसानी से समझना हो तो कहा जा सकता है कि अगर किसी व्यक्ति ने मई 2014 में सेंसेक्स (Sensex) या निफ्टी (nifty) में 1 लाख रुपये लगाया होता तो उसकी वैल्यू इस वक्त करीब 1.58 लाख रुपये के आसपास होती।
कांग्रेस गठबंधन की सरकार में मनमोहन सिंह लगातार 2 बार प्रधानमंत्री रहे थे। उनका पहला कार्यकाल 2004 से लेकर 2009 तक रहा था, वहीं दूसरा कार्यकाल 2009 से लेकर 2014 तक का रहा था।
मनमोहन सिंह के पहले कार्यकाल में यानी 2004 से 2009 के बीच सेंसक्स (Sensex) ने जहां करीब 180 फीसदी का रिटर्न (return) दिया था, वहीं निफ्टी (nifty) ने करीब 172 फीसदी का रिटर्न दिया था। यानी अगर किसी ने निवेशक ने उस दौरान 1 लाख सेंसेक्स (Sensex) में लगाया होगा तो उसका पैसा बढ़कर 2.80 लाख रुपये और निफ्टी (nifty) में 1 लाख रुपये लगाने वाले का पैसा बढ़कर करीब 2.72 लाख रुपये हो गया होगा।
इसके अलावा मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल यानी 2009 से लेकर 2014 के दौरान भी सेंसेक्स (sensex) और निफ्टी (nifty) का रिटर्न (return) मोदी सरकार (Modi government) से ज्यादा रहा है। इस दौरान जहां सेंसेक्स (Sensex) ने करीब 80 फीसदी तो निफ्टी (nifty) ने करीब 74 फीसदी का रिटर्न (return) दिया है। अगर किसी निवेशक ने मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल में 1 लाख रुपये का निवेश किया होता तो भी उसे मोदी सरकार से ज्यादा फायदा हुआ होगा। मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल में निवेशकों का 1 लाख रुपये सेंसेक्स (Sensex) में बढ़कर 1.80 लाख रुपये हो गया होगा वहीं निफ्टी (nifty) में यह 1 लाख रुपये बढ़कर 1.74 लाख रुपये बन गया होगा।
शेयरखान के उपाध्यक्ष मृदुल कुमार वर्मा के अनुसार सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (nifty) का रिटर्न वास्तविक (Real Return) होता है। उनके अनुसार शेयर बाजार (share market) और म्युचुअल फंड (mutual fund) देश में ऐसी जगहें हैं जहां आंकड़ों का पूरी तरह से डिजिटाइजेशन (Digitization) है। ऐसे में इन आंकड़ों पर शक नहीं किया जा सकता है। जहां तक रिटर्न (return) को रुपये में समझने की बात है तो सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (nifty) में फ्यूचर के सौदे होते हैं। अगर किसी निवेशक ने इन फ्यूचर सौदों (futures contract in stock market) में निवेश किया होगा तो उसको लगभग ऐसा ही फायदा हुआ होगा।
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