नई द‍िल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने रेनबैक्सी (Ranbaxy) के पूर्व प्रमोटर्स (promoters) मालविंदर मोहन सिंह (Malvinder mohan singh) और शिविंदर मोहन सिंह (Shivinder mohan singh) को भुगतान के मुद्दे को लेकर जेल भेजने की चेतावनी दी है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (Judge Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने रेनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर्स से कहा कि वो कंपनी दाइची सैंक्यो (Daiichi Sankyo) को 4,000 करोड़ रुपये भुगतान करने की ठोस योजना पेश करने के उसके आदेश का सिंह बंधुओं ने जो जवाब दिया है, शीर्ष अदालत उससे कतई संतुष्ट नहीं है।

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11 अप्रैल को होगी सुनवाई

जानकारी दें कि बैंच ने कहा कि अब इस मामले में 11 अप्रैल को सीधे अवमानना पर सुनवाई होगी। उसमें अगर यह साबित हो गया कि सिंह बंधुओं (singh brothers) ने अदालत के आदेश की अवमानना की है, तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। इससे पहले सिंगापुर के एक प्राधिकरण ने सिंह बंधुओं को आदेश दिया था कि वे दाईची सैंक्यो (Daiichi Sankyo) को 4,000 करोड़ रुपये का भुगतान करें। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने 14 मार्च को दोनों से कहा था कि वे भुगतान के संबंध में ठोस योजना पेश करें।

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हालांक‍ि सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने कहा कि 'हो सकता है कि आप आधी दुनिया के मालिक हों। लेकिन आपके पास इसकी कोई ठोस योजना नहीं है कि प्राधिकरण के फैसले की राशि कहां से जुटाएंगे। वहीं आपने कहा कि किसी पर आपके 6,000 करोड़ रुपये बकाया हैं। लेकिन इस राशि का कोई अता-पता नहीं है। हम इस मामले की तह तक जाएंगे और पता लगाएंगे कि आपने हमारे आदेशों का उल्लंघन क्यों किया। हम आपको जेल भेजेंगे।'

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यह है मामला

बता दें कि जापानी कंपनी (Japanese company) दाइची सैंक्यो (Daiichi Sankyo) ने मलविंदर सिंह और शिविंदर सिंह (shivinder singh and malvinder singh) से रैनबेक्सी कंपनी (Ranbaxy company) खरीद लिया था। इस सौदे की कीमत करीब 9500 करोड़ रुपये थी और डील के वक्त यह फार्मा सेक्टर की सबसे बड़ी डील थी। डील के बाद रैनबेक्सी पर कई ड्रग एजेंसियों (Drug Agencies) की निगेटिव रिपोर्ट आई। इस पर दाइची सैंक्यो ने सिंगापुर की एक अदालत में याचिका दर्ज किया था जिसके बाद सिंह बंधुओं को 3500 करोड़ रुपये जापानी कंपनी को देने का आदेश जारी हुआ था।

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वहीं रैनबेक्सी (renbaxy) के पूर्व प्रमुख सिंह बंधुओं के खिलाफ इसी आदेश को लागू करवाने के लिए दाइची सैंक्यो ने भारत में याचिका दायर किया हुआ है। सुप्रीम कोर्ट (SC) ने जापानी दवा कंपनी (Japanese pharmaceutical company) के पक्ष में फैसला सुनाया है लेकिन अभी तक सिंह बंधुओं (singh brothers) ने अब तक दवा कंपनी को भुगतान नहीं किया है।