नई द‍िल्‍ली: रिजर्व बैंक (RBI) विभिन्न नोटों की पहचान करने में दृष्टिबाधित लोगों की मदद करने के लिए एक मोबाइल ऐप विकसित कर रहा है। जी हां आपको इस बात की जानकारी दें कि रिजर्व बैंक ने बंबई उच्च न्यायालय को इसकी जानकारी दी है।

Advertisement

बता दें कि रिजर्व बैंक का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम मेहता ने मुख्य न्यायाधीश नरेश पाटिल और न्यायमूर्ति एनएम जामदार की पीठ को बताया कि केंद्रीय बैंक ने ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए पिछले महीने चार सदस्यीय समिति गठित की है।

Advertisement

आपको इस बात से अवगत कर दें कि पीठ नेशनल एसोसिएशन ऑफ द ब्लाइंड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि नये नोट और सिक्कों को छूकर पहचान पाना बेहद मुश्किल है। ऐसे में काफी परेशान‍ियों का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि याचिका में मांग की गयी है कि नये नोट और सिक्कों में विशिष्ट फीचर दिये जाएं। बता दें कि रिजर्व बैंक ने न्यायालय को कहा कि देश में 100 रुपये और इससे अधिक के ही नये नोट प्रचलन में हैं और इनमें दृष्टिबाधित लोगों की सुविधा के लिए पहले से ही चिह्न मौजूद हैं।
इतना ही नहीं रिजर्व बैंक ने माना कि ये चिह्न समय के साथ मिटते चले जाते हैं। इसी कारण एप विकसित करने पर काम किया जा रहा है जो नि:शुल्क उपलब्ध होगा और दृष्टिबाधित लोगों की मदद करेगा।

Advertisement

इस हफ्ते RBI गवर्नर पेमेंट्स बैंकों के प्रमुखों से मिलेंगे

वहीं दूसरी ओर रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को कहा कि वह पेमेंट्स बैंक की दिक्कतों एवं उनकी समस्याओं को समझने के लिये इस सप्ताह उनके प्रमुखों से मुलाकात करेंगे। अभी तक 7 पेमेंट्स बैंक अपना कामकाज शुरू हो चुके हैं।

बता दें कि आरबीआई गवर्नर ने कहा कि देश में फिनटेक को बढ़ावा देने के मद्देनजर रिजर्व बैंक की निगरानी में छोटी कंपनियों को इनोवेशन (रेग्यूलेटरी सैंडबॉक्स) की सुविधा देने को लेकर अगले दो महीने में दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।

Advertisement

क्या है सैंडबॉक्स?

सैंडबॉक्स तरीका एक ऐसा माध्यम है जो किसी नई टेक्नोलॉजी या सिस्टम को अमल में लाने से पहले प्रयोग करने और सीखने की सहूलियत देता है।