नई दिल्ली। लगातार वित्तीय दिक्कतों से जूझ रही भारत सरकार को गोल्ड आयात (Gold import) के आंकड़ों में राहत की किरण नजर आ रही है। बढ़ते फिजिकल डेफिसिट के चलते सरकार पर विपक्षी दल आक्रामक रहे हैं, लेकिन गोल्ड (Gold) आयात में कमी हो सकता है कि सरकार को फेस सेविंग का मौका दे दे। सरकार ने गोल्ड आयात (Gold import) रोकने के लिए कई कदम उठाए थे, जिनका यह असर माना जा रहा है।
ये हैं आंकड़े
चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती 11 महीने यानी अप्रैल से फरवरी 2019 के दौरान देश में गोल्ड (Gold) का आयात करीब 5.5 फीसदी घट गया है। इस दौरान कुल 29.5 बिलियन डालर के बराबर वैल्यू का गोल्ड आयात (Gold import) किया गया है। रुपये के हिसाब से यह वैल्यू करीब 2 लाख करोड़ रुपये होती है। वहीं पिछले वित्त वर्ष में इसी समय के दौरान 31.2 बिलियन डालर के बराबर वैल्यू का गोल्ड (Gold) का आयात किया गया था।
जेवरों के निर्यात पर भी पड़ा असर
एक तरफ जहां गोल्ड (Gold) का आयात घटा है, वहीं दूसरी तरफ गोल्ड (Gold) के जेवरों का निर्यात भी घटा है। जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट में चालू वित्तीय साल के शुरुआती 11 महीनों में करीब 6.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। यह निर्यात 28.5 बिलियन डॉलर के बराबर रहा है। वैसे सबसे ज्यादा गोल्ड आयात करने वाला देश है भारत
दुनिया में सबसे ज्यादा गोल्ड आयात (Gold import) करने वाला देश भारत ही है। इसकी सबसे ज्यादा डिमांड जेवर के लिए ही होती है।
पिछले सालों के गोल्ड (Gold) आयात का आंकड़ा
-वर्ष 2017-18 के दौरान भारत में 955.16 टन गोल्ड आयात (Gold import) हुआ था।
-2016-17 के दौरान भारत में 780.14 टन गोल्ड आयात (Gold import) किया गया था।
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