नई दिल्ली : गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) काउंसिल की 34 वीं बैठक मंगलवार को हुई। इस बैठक में आवास परियोजनाओं में मकानों पर नये टैक्स ढांचे को लागू करने की योजना को स्वीकृति दी गई। यह नए नियम 1 अप्रैल से लागू होंगे। इसके लागू होने के बाद घर खरीदना पहले के मुकाबले सस्ता होगा।
आचार संहिता की वजह से कोई नए फैसले नहीं लिए गए
इस बात से अवगत करा दें कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय में राजस्व सचित एबी पांडे ने जीएसटी काउंसिल की बैठक के निर्णय की जानकारी दी। एबी पांडे ने कहा कि राज्य सरकारों के साथ बातचीत कर के आवास विकास के कारोबार में लगी कंपनियों को नए टैक्स ढांचे के अनुपालन के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। बैठक के दौरान रियल एस्टेट सेक्टर पर वर्तमान टैक्स ढांचे से नए टैक्स ढांचे को लागू करने से जुड़े प्रावधानों पर और इसके अनुपालन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। बता दें कि लोकसभा चुनाव से पहले हुई इस बैठक में आचार संहिता की वजह से कोई नए फैसले नहीं लिए गए।
बता दें कि चालू वित्त वर्ष में जीएसटी कलेक्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं हो सका है। सिर्फ तीन बार 1 लाख करोड़ के पार कलेक्शन हुआ है। अन्य महीनों में कलेक्शन 1 लाख करोड़ के नीचे रहा है। जीएसटी कलेक्शन में कमी की वजह से नेट इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में भी कमी आई है। हालांकि कांउसिल की बैठक में इस मुद्दे को लेकर चर्चा नहीं हुई। जीएसटी के तहत रेवेन्यू कलेक्शन इस साल फरवरी में पिछले साल के मुकाबले 13 फीसदी बढ़कर 97,247 करोड़ रुपये हो गया। फरवरी, 2018 में जीएसटी संग्रह 85,962 करोड़ रुपये था। इससे पहले जनवरी 2019 में जीएसटी कलेक्शन 1,02,503 करोड़ रुपये रहा।
आपको जानकर खुशी होंगी कि पहली बार घर खरीदने का सुनहरा है। आप इसको इस तरह समझ सकते हैं। अगर आप पहली बार घर अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीद रहे हैं तो अभी तक 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी का भुगतान करना होता है। वहीं एक अप्रैल से यह दर घटकर 5 फीसदी हो जाएगी, यानी जीएसटी में 7 फीसदी की कमी। इसके चलते 45 लाख रुपए की प्रॉपर्टी पर 3.15 लाख रुपए की सीधे बचत होगी। अगर आप पहली दफा घर खरीदने जा रहे हैं तो प्रधानमंत्री आवासीय योजना के तहत होम लोन पर 2.67 लाख रुपए की सब्सिडी मिलेगी। इस तरह कुल 5.82 लाख रुपए की बचत होगी।
बता दें कि देश में घरों की कमी को दूर करने के लिए किफायती घरों की परिभाषा भी बदली गई है। मेट्रो शहर में 60 वर्ग मीटर (करीब 650 वर्ग फीट) के घर फिफायती श्रेणी में जबकि नॉन-मेट्रो शहरों में यह आकार 90 वर्ग मीटर (970 वर्ग फीट) कर दिया गया है। शर्त ये है मकान की कीमत 45 लाख रुपए तक हो। इसका मतलब यह हुआ कि 45 लाख रुपए तक के मकान किफायती श्रेणी में आएंगे।
More Articles
- अदाणी एंटरप्राइजेज ने एयरलाइन लॉन्च की अटकलों को किया खारिज, कहा- रिपोर्ट्स निराधार
- भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें
- Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?
- ITR फाइल करने का आज आखिरी मौका: क्या आज के बाद लगेगा जुर्माना? जानें बचने का तरीका
- US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति
- GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित