नई द‍ि‍ल्‍ली : प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब तक 2.6 करोड़ से अधिक छोटे और सीमांत किसानों को 5,215 करोड़ रुपए का अंतरण किया गया। आपको याद द‍िला दें कि पिछले महीने 2019-20 के अंतरिम बजट में सरकार ने इन किसानों को एक निश्चित न्यूनतम आय मुहैया कराने के लिए इस योजना की घोषणा की थी।

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75,000 करोड़ रुपए की इस योजना की घोषणा

आम चुनावों से पहले केंद्र सरकार ने 75,000 करोड़ रुपए की इस योजना की घोषणा की थी। इसके तहत देश में दो हेक्टेयर से कम जोत वाले करीब 12 करोड़ किसानों को तीन किस्तों में 6,000 रुपए की न्यूनतम वार्षिक आय मुहैया करायी जानी है।

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अंतरिम बजट में सरकार ने इसके लिए 20,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। इसके तहत मार्च के अंत तक किसानों को 2,000 रुपए की पहली किस्त पहुंचानी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की आधिकारिक शुरुआत 24 फरवरी को गोरखपुर में की थी।

पीएम ने ट्वीट के जर‍िये कहा

रविवार को प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक ट्वीट में कहा कि इस योजना की घोषणा के 37 दिन के भीतर 2.6 करोड़ से अधिक छोटे एवं सीमांत किसानों को अब तक 5,215 करोड़ रुपए उनके बैंक खाते में अंतरित किए गए हैं। पश्चिम बंगाल और कई कांग्रेस शासित राज्य पीएम किसान योजना के लिए नाम नहीं भेज रहे हैं। इसके पीछे राजनैतिक कारण हैं। इन राज्यों के किसान 6 हजार रुपए सालाना की आय से वंचित रहेंगे।

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प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना की शुरुआत अगस्‍त 2017 में की गई थी। यह योजना पूरी तरह से कृषि केंद्रित योजना है। इस योजना का उद्देश्‍य कृषि का आधुनिकीकरण करना और कृषि बर्बादी को कम करना है। इस योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 14वें वित्‍त आयोग चक्र की सह-समाप्ति के साथ वर्ष 2016-20 तक की अवधि के लिए 6,000 करोड़ रुपए के आवंटन से एक नई केंद्रीय क्षेत्र स्‍कीम- प्रधान मंत्री किसान सम्‍पदा योजना (कृषि-समुद्री प्रसंस्‍करण एवं कृषि-प्रसंस्‍करण क्‍लस्‍टर विकास स्‍कीम) का अनुमोदन दिया है। इस स्‍कीम का कार्यान्‍वयन खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्रालय द्वारा किया जाएगा।

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प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना का लाभ एवं फायदे

प्रधान मंत्री किसान सम्‍पदा योजना एक व्‍यापक पैकेज है जिसके परिणामस्‍वरूप खेत से लेकर खुदरा बिक्री केंद्रों तक दक्ष आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के साथ आधुनिक अवसंरचना का सृजन होगा । इससे, देश में न केवल खाद्य प्रसंस्‍करण क्षेत्र की वृद्धि को तीव्र गति प्राप्‍त होगी बल्कि यह किसानों को बेहतर मूल्‍य दिलाने तथा किसानों की आय को दुगुना करने, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के भारी अवसरों का सृजन करने, कृषि उपज की बर्बादी में कमी लाने, प्रसंस्‍करण तथा प्रसंस्‍कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात के स्‍तर को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

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