मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा है कि तरलता चिंताओं को दूर करने के लिए ओपेन मार्केट आपरेशन (OMO) के तहत 7 मार्च को 12,500 करोड़ रुपये डालेगा। इससे सिस्टम में तलरता बढ़ेगी और बैंक आसानी से काम कर सकेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फायनेंशियल सर्विसिस लिमिटेड (IL&FS) के संकट में आने के बाद से सिस्टम में तरलता की काफी कमी थी। इसके चलते कई सेक्टर को कर्ज नहींं मिल पा रहा था।

Advertisement

आरबीआई (RBI) खरीदेगा सरकारी प्रतिभूतियों को
आरबीआई (RBI) ने एक बयान में कहा, "मौजूदा तरलता हालात के आकलन के आधार पर और टिकाऊ तरलता की जरूरतें बढ़ने के कारण आरबीआई (RBI) ने मुक्त बाजार संचालन के तहत 125 अरब रुपये की राशि की सरकारी प्रतिभूतियों को मल्टी प्राइज मेथड का इस्तेमाल करते हुए मल्टी सिक्युरिटी ऑक्शन के जरिए 7 मार्च, 2019 को खरीदने का निर्णय लिया है।" आरबीआई (RBI) ने अपने बयान में कहा है कि सभी प्रतिभूतियों को एकसाथ रखने के लिए 125 अरब रुपये राशि की एक सकल सीमा निर्धारित है।

Advertisement

यह भी पढ़ें : LIC HF दे रहा FD पर SBI से ज्यादा ब्याज, ऐसे उठाएं फायदा

फाइनेंशियल सेक्टर में वित्तीय संकट
उल्लेखनीय है कि वित्तीय सेक्टर चार महीनों से तरलता संकट से जूझ रहा है, जब इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फायनेंशियल सर्विसिस लिमिटेड (infrastructure leasing & financial services) (IL&FS) जब अपने भुगतान दायित्यों को पूरा करने में असमर्थ रहा तो आरबीआई (RBI) को यह कदम उठाना पड़ा है। इसके कारण एनबीएफसी सेक्टर को ऋण देने को लेकर बैंक और अन्य संस्थान रुचि नहीं ले रहे थे, जिससे दिक्कतें लगातार बढ़ रही थीं।

Advertisement

म्युचुअल फंड (mutual fund) कंपनियां भी दिक्कत में
इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फायनेंशियल सर्विसिस लिमिटेड (infrastructure leasing & financial services) (IL&FS) के संकट में आने से कई म्युचुअल फंड कंपनियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन म्युचुअल फंड (mutual fund) कंपनियों ने IL&FS में निवेश कर रखा है, जो पैसा अब फंस गया है।

यह भी पढ़ें : Bank जीरो बैलेंस में भी खोलते हैं बच्चों के नाम अकाउंट, जानें फीचर्स