मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नयी इलेक्ट्रॉनिक्स नीति को मंजूरी दे दी। इसके तहत 2025 तक 400 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण पारिस्थतिकी तंत्र विकसित करने और एक करोड़ रोजगार के अवसरों का सृजन करने का लक्ष्य है। बता दें कि National electronics policy 2012 में लागू हुई थी। अब सरकार इस नीति को नए सिरे से लागू करने जा रही है।

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2025 तक तैयार होंगे 100 करोड़ मोबाइल हैंडसेट

बता दें कि सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद का कहना हैं कि हमने 2025 तक 400 अरब डॉलर का इकोसिस्टम तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इससे 1 करोड़ लोगों को नौकरी मिलेगी। इस नीति के तहत 2025 तक 100 करोड़ मोबाइल हैंडसेट को मैन्युफैक्चर करने का लक्ष्य रखा गया है। इनकी कीमत 13 लाख करोड़ रुपए होगी। इसमें 7 लाख करोड़ रुपए के एक्सपोर्ट होने वाले 60 करोड़ मोबाइल फोन शामिल होंगे।

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ग्रोथ रेट 32-33 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य

मौके पर रवि शंकर ने बताया कि जब मई 2015 में उनकी सरकार सत्ता में आई तो देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन की ग्रोथ रेट 5.5 फीसदी थी। 2017-18 में यह बढ़कर 26.5 फीसदी हो गई। अब सरकार ने इस ग्रोथ रेट का बढ़ाकर 32-33 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स इनिशिएटिव को प्रमोट करने की बात

हालांकि इस नीति के तहत रक्षा क्षेत्र, मेडिकल और एविएशन क्षेत्र के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम तैयार करने का खाका भी तैयार किया गया है। इसके साथ ही नेशनल साइबर सिक्योरिटी प्रोफाइल को बेहतर बनाने के लिए भरोसेमंद इलेक्ट्रॉनिक्स इनिशिएटिव को प्रमोट करने की भी बात तय की गई।

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नई नीति के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में नए क्लस्टर बनाने का प्रस्ताव किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने बताया कि इस स्कीम के तहत एक बड़ी कंपनी के साथ साथ कंपोनेंट बनाने वाली कई इकाइयों का एक पूरा इकोसिस्टम स्थापित किया जाएगा। इससे न केवल कंपनियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी बल्कि देश को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने और निर्यात में वृद्धि का लाभ भी मिलेगा।

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बता दे कि देश में चिप निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई नीति में सावरेन पेटेंट फंड स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है। इस फंड के जरिए चिप व चिप कंपोनेंट प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इससे भारतीय चिप निर्माताओं की लागत में कमी आएगी।