नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (Insolvency And Bankruptcy Code) पर बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने की आईबीसी (IBC) को चुनौती दी जाने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने इस कानून की संवैधानिकता को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने 16 जनवरी को इस मामले पर फैसला सुरक्षित रखा था। आईबीसी (IBC) के तहत दिवालिया कंपनियों के प्रमोटर दिवालिया कार्रवाई के दौरान बोली लगाने की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकते हैं।

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सभी याचिकाएं खारिज
जस्टिस आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वे 'संपूर्णता' में इसकी संवैधानिक वैधता को मान्यता देते हैं। हालांकि न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अधिनियम में संबंधित पक्ष से आशय कारोबार से जुड़ा कोई व्यक्ति होना चाहिए। इसी के साथ न्यायालय ने विभिन्न कंपनियों द्वारा आईबीसी (IBC) के कई प्रावधानों को चुनौती देने वाली तमाम याचिकाओं को खारिज कर दिया।

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2017 में लागू हुआ है यह कानून
आईबीसी (IBC) यानी दिवालिया कानून को जून 2017 में लाया गया था। उस वक्त आरबीआई (RBI) ने बैंकों को निर्देश दिया कि वे 12 बड़े जानबूझ कर कर्ज न वापस करने वालों के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल में जाएं। बैंकों के कुल 8 लाख करोड़ रुपये के एनपीए का करीब 25 फीसदी हिस्सा इन 12 कंपनियों पर बाकी था। हालांकि इनमें से अभी तक केवल पांच का मामले ही अब तक सुलझ पाए हैं।

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क्या है इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्ट्सी कोड
इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्ट्सी कोड के तहत अगर कोई कंपनी कर्ज नहीं देती है तो उससे कर्ज वसूलने के लिए दो तरीके हैं। एक या तो कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया जाए। इसके लिए एनसीएलटी की विशेष टीम कंपनी से बात करती है। कंपनी के मैनेजमेंट के राजी होने पर कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया जाता है और उसकी पूरी संपत्ति पर बैंक का कब्जा हो जाता है। बैंक उस असेट को किसी अन्य कंपनी को बेचकर कर्ज के पैसे वसूलता है।

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कर्ज वसूली का दूसरा तरीका
कर्ज वसूली का दूसरा तरीका है कि मामला एनसीएलटी में ले जाया जाए। कंपनी के मैनेजमेंट से कर्ज वापसी पर बातचीत होती है। 180 दिनों के भीतर कोई समाधान निकालना होता है। कंपनी को उसकी जमीन या संपत्ति बेचकर कर्ज चुकाने का विकल्प दिया जाता है। ऐसा न होने पर कंपनी को ही बेचने का फैसला किया जाता है। खास बात यह है कि जब कंपनी को बेचा जाता है तो उसका प्रमोटर या निदेशक बोली नहीं लगा सकते हैं।

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